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लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग ने फेफड़ों के कैंसर एवं अन्य घातक रोगों से संबंधित बार-बार होने वाले प्लूरल इफ्यूजन के उपचार में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग में पहली बार इंडवेलिंग प्लूरल कैथेटर प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार वर्मा एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों डॉ. हेमंत कुमार डॉ. मृत्युंजय सिंह डॉ. सुलक्षणा गौतम तथा डॉ. पुलकित गुप्ता के मार्गदर्शन एवं सहयोग से यह प्रक्रिया सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुई। संस्थान के निदेशक ने इस उपलब्धि पर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा यह कदम उन्नत श्वसन चिकित्सा सेवाओं को मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार वर्मा ने कहा यह प्रक्रिया ऐसे मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी है जिनके फेफड़ों के आसपास बार-बार द्रव एकत्रित हो जाता है, जिससे उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ होती है। पारंपरिक उपचार में मरीज को बार-बार अस्पताल आकर द्रव निकालने की आवश्यकता पड़ती है, जबकि आईपीसी के माध्यम से एक विशेष कैथेटर को प्लूरल कैविटी में स्थापित कर दिया जाता है, जिससे आवश्यकता अनुसार द्रव को आसानी से निकाला जा सकता है। डॉ. हेमंत कुमार ने बताया मरीज स्टेज-4 कैंसर से पीड़ित था तथा उसे बार-बार होने वाले प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़ों के आसपास पानी भरना) की समस्या थी। सांस फूलने की शिकायत के कारण हर 4-5 दिन में उसके फेफड़ों के आसपास जमा द्रव को निकालना पड़ता था, जिससे उसे अस्थायी राहत मिलती थी।
मरीज गोंडा का निवासी था और बार-बार लखनऊ आकर द्रव निकलवाना उसके लिए अत्यंत कठिन था। उन्होंने बताया आईपीसी तकनीक अतिरिक्त लाभ ऑटोप्ल्यूरोडेसिस है। इस प्रक्रिया में फेफड़ों को घेरे रहने वाली दोनों झिल्लियां, जिनके बीच द्रव बनता है, समय के साथ आपस में चिपक सकती हैं। इससे द्रव बनने की प्रक्रिया स्थायी रूप से रुक सकती है और मरीज को बार-बार प्लूरल इफ्यूजन की समस्या से दीर्घकालिक राहत मिल सकती है।
इस नवीन तकनीक से मरीजों की जीवन-गुणवत्ता में सुधार होगा अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता कम होगी तथा बार-बार होने वाली चिकित्सीय प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। आरएमएलआईएमएस निरंतर नवीनतम चिकित्सा तकनीकों को अपनाकर प्रदेश के मरीजों को उच्च स्तरीय एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।







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