











































वन अवध सेंटर में ‘वर्ल्ड नो-टोबैको डे’ पर स्वास्थ्य व जागरूकता शिविर
लखनऊ। अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल और वन अवध सेंटर द्वारा संयुक्त रूप से ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे के अवसर पर वन अवध सेंटर, गोमतीनगर में जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर में अपोलोमेडिक्स के डॉक्टर्स द्वारा वन अवध सेंटर में आने वाले आगंतुकों को तम्बाकू सेवन से स्वास्थ्य को पहुंचने वाले नुकसान के बारे में बताया गया व उनके स्वास्थ्य का परीक्षण भी किया गया। इस स्वास्थ्य शिविर में अपोलोमेडिक्स के फिजीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट व डायटीशियन उपस्थित रहे।
इस स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर में स्वास्थ्य जांच के लिए आगन्तुको का ब्लड प्रेशर, रैंडम ब्लड शुगर, फेफड़ों की क्षमता जानने के लिए पीक एक्सपिरेशन फ्लो रेट चेक तथा बॉडी मास इंडेक्स के लिए कद व वजन की माप और ईसीजी किया गया।

वन अवध केंद्र की एग्जीक्यूटिव वाइस- प्रेसिडेंट सरस्वती सिंह ने कहा, “वर्ल्ड नो टोबैको डे पर अपोलोमेडिक्स के डॉक्टर्स ने मॉल में आने वालों को तम्बाकू-सेवन के खतरों से आगाह किया गया व उनके स्वास्थ्य की जांच की गई, इसके लिए हम अपोलोमेडिक्स का दिल से आभार व्यक्त करते हैं।
यह वन अवध सेंटर की तरफ से एक प्रयास है, सभी को जागरूक करते हुए कहा कि तम्बाकू सेवन किस तरह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है, बल्कि इसका दूरगामी आर्थिक व मानसिक दुष्प्रभाव भी परिवारों पर पड़ता है। सेहत, जीवन व समाज को नुकसान पहुंचाने वाली तम्बाकू को हमेशा के लिए ना कहने का ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे’ से बेहतर कोई अवसर नहीं होगा।“
अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीईओ व एमडी डॉ मयंक सोमानी तम्बाकू सेवन के प्रति आगाह करते हुए कहा, “ वर्ल्ड नो टोबैको डे पर हमें वन अवध सेंटर के सहयोग से इस जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करके बहुत प्रसन्नता हो रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के आंकड़ों के अनुसार तंबाकू सेवन से विश्व में हर छह सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। फेफड़े, मुंह व गले के कैंसर के मामलों में 90 फीसदी मामले तंबाकू उत्पादों के सेवन के कारण होते हैं। तंबाकू सेवन से दिल की बीमारी, लकवा, डायबिटिज, गठिया, फेफड़े आदि के रोग होने का जोखिम बढ़ जाता है। कहा भी जाता है, ‘बचाव इलाज से हमेशा बेहतर होता है,’ इसलिए तम्बाकू को ना कह, जिन्दगी को हां कहिए।”







हुज़ैफ़ा अबरार May 12 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार May 07 2026 0 350
हुज़ैफ़ा अबरार May 03 2026 0 259
हुज़ैफ़ा अबरार May 12 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3808
एस. के. राणा January 13 2026 0 3780
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3668
एस. के. राणा January 20 2026 0 3626
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3346
एस. के. राणा February 01 2026 0 3024
एस. के. राणा February 04 2026 0 2877
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86287
सौंदर्या राय April 08 2022 0 33895
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37131
सौंदर्या राय April 05 2022 0 34909
लेख विभाग March 19 2022 0 34314
सौंदर्या राय March 16 2022 0 71573
अक्सर सुनने में आता है कि स्ट्रेचर नहीं मिलने पर मरीज या शव को परिजन कंधे पर ले गए। कभी सुनाई देता क
डेंगू के 14 रोगी उर्सला और 10 रोगी हैलट तथा 61 रोगी निजी अस्पतालों में हैं लेकिन जो डेंगू के लिए डेड
जिले में बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। अस्पताल में रोजाना 5 से 6 मरीज भर्ती हो रहे हैं। वहीं पि
दांत अगर ठीक से साफ नहीं हुए तो धीरे- धीरे पीलापन जमने लगता है। हालांकि ज्यादा परेशान होने की जरूरत
लोक बन्धु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि प्रशिक्षण से जुड़ी सभी तैयारि
स्वाथ्य बीमा में इन पेशेंट हॉस्पटिलाइजेशन, अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद का खर्च, कोविड-19 क
242 लोगों का किया गया परीक्षण, 19 मरीजों को आपरेशन के लिए चिन्हित कर निशुल्क इलाज के लिए भेजे गए अस्
मरीजों की भीड़ के चलते वार्ड फुल होते जा रहे हैं। रेफरल केस अभी भी आ रहे हैं। उर्सला अस्पताल की ओर
सीबीआरई की रिपोर्ट ‘द इवॉल्विंग इंडियन हेल्थकेयर इकोसिस्टम: व्हाट इट मीन्स फॉर द रियल एस्टेट सेक्टर’
युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल संदीप मुखर्जी ने उन्हें पेशेवर क्षमता के उच्चतम

COMMENTS