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लखनऊ। मेदांता अस्पताल के न्यूरो सांइसेस डिपार्टमेंट द्वारा स्ट्रोक केयर जागरूकता को लेकर 3 किलोमीटर की वाॅकाथाॅन का आयोजन किया गया, जिसमें 700 से 800 लोग शामिल हुए। यह वॉक अंसल गोल्फ पार्क से शुरू हुई। कार्यक्रम में मेदांता समेत प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले विभिन्न कर्मचारियों व आम जन हिस्सा लिया। मेदांता के वाइस चेयरमैन डॉ. विक्रम ने वाॅकाथाॅन को फ़्लैग ऑफ किया। इसका उद्देश्य स्ट्रोक केयर को लेकर जागरूकता बढ़ाना था।
स्ट्रोक के प्रति जागरूकता तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला रोकथाम, दूसरा इलाज और तीसरा रीहैबिलिटेशन है। लोग स्ट्रोक को कैसे रोक सकते हैं, जिसमें ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और वज़न को नियंत्रित रखना शामिल है। अगर किसी को स्ट्रोक हो जाए तो उसके शुरुआती लक्षणों को तुरंत पहचानना जरूरी है और तीसरी स्थिति में अगर किसी को स्ट्रोक के बाद पैरालिसिस हो जाए तो उनको कैसे रीहैबिलिटेट किया जाए। स्ट्रोक में समय से इलाज के लिए "बी फास्ट" का तरीक़ा याद रखना जरूरी है। कभी भी संतुलन बिगड़े, आंखों से धुंधला दिख रहा हो, चेहरा टेढ़ा हो, हाथ उठाने में दिक्कत हो या बोलने में परेशानी हो तो समय बर्बाद किए बिना मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचायें।

स्ट्रोक में एक इंजेक्शन दिया जाता है जो मरीज़ को साढ़े चार घंटे के भीतर देना जरूरी होता है। इसलिए मरीज़ को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना ज़रूरी है ताकि इलाज समय पर शुरू किया जा सके। इस बार वर्ल्ड स्ट्रोक डे की थीम "एव्री मिनट काउंट्स" है जो बताती है कि स्ट्रोक के बाद हर मिनट इलाज के नतीजों को प्रभावित करता है। मेदांता जैसे विशेषज्ञ केंद्रों में 24 घंटे तक स्ट्रोक का इलाज उपलब्ध है और बी फास्ट के लक्षण दिखने पर मरीज़ को तुरंत मेदांता के एमरजेंसी नंबर 1068 पर संपर्क करें।
समय पर इलाज न मिलने पर कई मरीज़ पैरालिसिस का सामना करते हैं और फिर उनके रिहैबिलिटेशन की जरूरत पड़ती है। इसलिए स्ट्रोक अवेयरनेस का तीसरा हिस्सा रिहैबिलिटेशन है जिसमें एक्सरसाइज और नियमित फिजियोथेरेपी शामिल होती है। हर 06 सेकंड में एक व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार होता है और हर 04 मिनट में एक व्यक्ति स्ट्रोक के कारण जान गंवाता है। अब स्ट्रोक तेजी से आम बीमारी बन चुका है और इसे ब्रेन अटैक भी कहा जाता है।
स्ट्रोक का बड़ा कारण दिमाग की रक्त नलियों में ब्लॉकेज हो जाना है जिसे समय रहते जांच कर ब्लॉकेज से पहले भी ठीक किया जा सकता है। अनहेल्दी लाइफस्टाइल, खराब भोजन आदतें, स्ट्रेस और वजन बढ़ने से बीपी और डायबिटीज जैसी स्थितियां आगे चलकर स्ट्रोक का कारण बनती हैं, जबकि वायु प्रदूषण भी स्ट्रोक का एक बड़ा कारण है।
एक ओर अमेरिका ने ब्लडप्रेशर की व्यापक स्क्रीनिंग कर स्ट्रोक को लगभग 45 प्रतिशत तक कम किया है, जबकि दक्षिण एशिया में स्ट्रोक के मामले दुनिया भर का लगभग 80 प्रतिशत हैं।







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