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नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) ने चालू वित्तीय वर्ष 2020-2021 में 12 जनवरी तक रु 484 करोड़ की बिक्री दर्ज़ की है। जो इसी अवधि के लिए पिछले वर्ष की तुलना में 60 फीसदी अधिक है। सरकार का मानना है की इस बिक्री से दवा उपभोगताओं को तीन हज़ार करोड रुपये की बचत हुई है। देश भर में कुल 7,064 जनऔषधि केंद्र हैं। जिनमें से 260 नए जन औषधि केंद्र स्थापित किये गए हैं। केंद्र सरकार ने मार्च 2025 के अंत तक 10,500 जन औषधि केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
PMBJP ने कोरोना काल में मार्च से जून, 2020 तक कई चुनौतियों का सामना किया था, एपीआई और अन्य कच्चे माल की कमी हो गयी थी। कच्चे माल और उत्पाद को ले जाने और लाने के लिए वाहनों की उपलब्धता नहीं थी। COVID लॉकडाउन के बावजूद PMBJP ने 2020-2021 की पहली तिमाही में रु 146.59 करोड़ की बिक्री दर्ज़ किया। जो 2019-2020 की पहली तिमाही में रु 75.48 करोड़ था। जन औषधि केंद्र लॉकडाउन के दौरान आवश्यक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खुले रहे। इन केंद्रों से लगभग 15 लाख फेस मास्क, 80 लाख टैबलेट हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और 100 लाख पेरासिटामोल टैबलेट की बिक्री हुई , जिससे उपभोक्ताओं को लगभग रु 1260 करोड़ की बचत हुई।
इन केंद्रों द्वारा बेची जाने वाली दवाओं की वर्तमान सूची में 1,250 दवाएं और 204 सर्जिकल उपकरण शामिल हैं। 31 मार्च, 2024 के अंत तक इसे 2,000 दवाओं और 300 सर्जिकल उत्पादों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। ताकि सभी आवश्यक दवाएं, जैसे - एंटी डायबिटीज, कार्डियोवस्कुलर ड्रग्स, एंटी-कैंसर, एनाल्जेसिक और एंटीथायरेक्टिक्स, एंटी- एलर्जी, गैस्ट्रो, विटामिन और खनिज, खाद्य पूरक और अन्य दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित किया जा सके।
जनऔषधि दवाओं की कीमत कम से कम 50% और कुछ मामलों में, ब्रांडेड दवाओं के बाजार मूल्य का 80% से 90% तक सस्ती है। ये दवाएं केवल डब्ल्यूएचओ-जीएमपी अनुपालन निर्माताओं से खुले निविदा के आधार पर खरीदी जाती हैं।







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