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लखनऊ। नेशनल पीएमआर डे 26 के पर डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग ने इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल के सहयोग से खास कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में दिव्यांग लोगों और बीमारी या चोट से उबर रहे लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में रिहैबिलिटेशन मेडिसिन की बढ़ती भूमिका पर ज़ोर दिया। इस साल की थीम है सभी के लिए रिहैबिलिटेशन जीवन भर के लिए रिकवरी। इसका उद्घाटन लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. सीएम सिंह ने किया। उन्होंने मरीज़ों की देखभाल के लिए कई अत्याधुनिक रिहैबिलिटेशन और इंटरवेंशनल सुविधाओं की शुरुआत की। इनमें रिपीटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन वर्चुअल रियलिटी आधारित रिहैबिलिटेशन हाई-रिज़ॉल्यूशन मस्कुलोस्केलेटल अल्ट्रासाउंड और इंटरवेंशनल फिजियेट्री और पेन मैनेजमेंट के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन शामिल थे।
निदेशक ने कहा रिहैबिलिटेशन आधुनिक हेल्थकेयर का अहम हिस्सा है और यह मरीज़ों की कार्यक्षमता आज़ादी और सम्मान को बहाल करने में अहम भूमिका निभाता है। इन एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज़ के आने से विभाग और संस्थान विश्व-स्तरीय एविडेंस-बेस्ड रिहैबिलिटेशन सेवाएँ दे पाएँगे और मरीज़ों की व्यापक देखभाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मज़बूत कर पाएँगे। प्रो. सिंह ने शहीद पथ कैंपस में 1000 बिस्तरों की सुविधा के लिए हो रही प्रगति की जानकारी देते हुए भरोसा दिलाया कि शहीद पथ कैंपस में सुविधा शुरू होने के बाद और जगह की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा पीएमआर दिव्यांग लोगों को आज़ादी सम्मान गरिमापूर्ण व संतोषजनक जीवन जीने में सक्षम बनाता है। नई शुरू की गई सुविधाओं से स्ट्रोक रीढ़ की हड्डी की चोट दिमाग की गंभीर चोट (ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी) पार्किंसंस रोग सेरेब्रल पाल्सी मस्कुलोस्केलेटल विकारों स्पोर्ट्स इंजरी पुराने दर्द की स्थितियों और अन्य न्यूरोलॉजिकल और ऑर्थोपेडिक दिव्यांगताओं वाले मरीज़ों के इलाज में काफी सुधार होने की उम्मीद है। ये एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज़ ज़्यादा सटीक डायग्नोसिस, टारगेटेड इंटरवेंशन, तेज़ी से रिकवरी और बेहतर फंक्शनल नतीजों में मदद करेंगी।
पीएमआर विभाग के प्रमुख प्रो. विरिंदर सिंह गोगिया ने बताया रिहैबिलिटेशन मेडिसिन (पुनर्वास चिकित्सा) केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता, भागीदारी और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।नियमित पुनर्वास प्रक्रिया में पीएमआर और वर्चुअल रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल करना इस क्षेत्र में बेहतर और व्यापक पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है। कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्य रेजिडेंट डॉक्टर फिजियोथेरेपिस्ट ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट स्पीच और लैंग्वेज थेरेपिस्ट क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट नर्सिंग स्टाफ मेडिकल सोशल वर्कर छात्र और अन्य हेल्थकेयर कार्मिक शामिल हुए। पीएमआर विभाग के मरीज़ों और उनकी देखभाल करने वालों ने प्रतिभाग किया। विकलांगता की रोकथाम शुरुआती पुनर्वास सहायक तकनीकों और समावेशी स्वास्थ्य सेवा पर ज़ोर देने वाली जागरूकता गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।
PMR विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और नेशनल PMR डे 26 के आयोजन समन्वयक डॉ. यश वीर सिंह ने सहयोग के लिए निदेशक व्यक्तियों, फैकल्टी सदस्यों कर्मचारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विभाग के उस विज़न को दोहराया जिसमें उन्नत पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना और हेल्थकेयर पेशेवरों व आम जनता के बीच पुनर्वास चिकित्सा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना शामिल है। इस कार्यक्रम ने इस संदेश को और मज़बूत किया कि पुनर्वास केवल एक वैकल्पिक सेवा नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा का एक ज़रूरी हिस्सा है, जो लोगों को अपनी कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता के उच्चतम स्तर तक पहुँचने में मदद करता है।







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