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लखनऊ। आरएमएल हॉस्पिटल्स में 400 से अधिक रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल सर्जरी की जा चुकी हैं। यह पब्लिक हैल्थकेयर सिस्टम में एडवांस्ड गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल केयर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हॉस्पिटल में दा विंची सर्जिकल सिस्टम अपनाए जाने से रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल सिस्टम का धीरे-धीरे विस्तार हुआ और यह कुछ जटिल मामलों से विस्तृत सेवा में विकसित होता गया। आज इस सिस्टम द्वारा हेपेटोबिलियरी कोलोरेक्टल अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल और बैरियाट्रिक सर्जरी की जाती है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को मिनिमली इन्वेजिव प्रक्रियाओं का लाभ मिल सके। इस हॉस्पिटल के बढ़ते अनुभव के साथ मरीजों को विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल प्रक्रियाओं के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। कई बैरियाट्रिक मरीजों को ऑपरेशन के बाद दूसरे दिन हॉस्पिटल से छुट्टी मिल जाती है और वो ज्यादा जल्दी अपनी दैनिक गतिविधियाँ शुरू कर पाते हैं। कॉम्प्लेक्स कोलोरेक्टल प्रक्रियाएं करवाने वाले मरीजों जिनमें वो मरीज भी शामिल हैं, जिनकी पहले कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी हो चुकी है, को काफी जटिल इलाज के बाद अनुकूल नतीजे मिले हैं। इंटर्नल पेशेंट फीडबैक में 80 प्रतिशत मरीजों ने माना कि सर्जरी का उनका अनुभव काफी बेहतर था। इस फीडबैक से इन नतीजों की पुष्टि होती है।
इस प्रोग्राम से सरकारी हॉस्पिटल में एडवांस्ड सर्जिकल टेक्नोलॉजी शुरू करने की व्यावहारिकता प्रदर्शित हुई। विभाग ने व्यवस्थित प्रशिक्षण मल्टीडिसिप्लिनरी टीमवर्क और क्लिनिकल नतीजों के लगातार मूल्यांकन द्वारा मरीजों की सुरक्षा और केयर की क्वालिटी पर विशेष ध्यान देते हुए विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल समस्याओं के लिए रोबोटिक टेक्नोलॉजी के उपयोग का दायरा बढ़ाया है। डॉ. अंशुमन पांडे हेड ऑफ डिपार्टमेंट सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी आरएमएलआईएमएस ने कहा हमें सबसे अधिक खुशी तब मिली जब हमने विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल प्रक्रियाओं में मरीजों की अच्छी रिकवरी देखी। बैरियाट्रिक सर्जरी कराने वाले मरीज ऑपरेशन के दूसरे दिन ही हॉस्पिटल से छुट्टी पाकर अपने घर जाने लगे और ज्यादा जल्दी अपनी दैनिक गतिविधियाँ शुरू करने लगे।
सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी करा चुके कोलोरेक्टल मरीजों ने मुश्किल इलाज के बावजूद अच्छी रिकवरी प्रदर्शित की। हर प्रक्रिया में सर्जन दा विंची सर्जिकल सिस्टम को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में रखते हैं। वो हर इंस्ट्रूमेंट के मूवमेंट को संभालते हुए रूटीन और बहुत जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल सर्जरी सफलतापूर्वक करते हैं। हमारा अनुभव जैसे-जैसे बढ़ रहा वैसे-वैसे विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल समस्याओं के लिए इस विधि का उपयोग करने का हमारा आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है। हम हर क्लिनिकल परिणाम का गहराई से मूल्यांकन भी कर रहे हैं। डॉ. सी एम सिंह डायरेक्टर आरएमएलआईएमएस ने कहा मरीजों की एक बड़ी आबादी का इलाज सरकारी अस्पतालों में होता है। इसलिए इन अस्पतालों में एडवांस्ड सर्जिकल सिस्टम की उपलब्धता बढ़ाते रहना महत्वपूर्ण है। हमारा अनुभव प्रदर्शित करता है कि व्यवस्थित प्रशिक्षण, क्लिनिकल गवर्नेंस और मल्टीडिसिप्लिनरी सहयोग द्वारा रोबोटिक सर्जरी का उपयोग रोजमर्रा की गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल प्रक्रियाओं में सफलतापूर्वक किया जा सकता है, जिससे ज्यादा से ज्यादा मरीजों को मिनिमली इन्वेजिव ट्रीटमेंट का लाभ मिल सकेगा।
रोहित महाजन वाईस प्रेसिडेंट एवं जनरल मैनेजर भारत इन्ट्यूटिव ने कहा हम इस उपलब्धि के लिए आरएमएल हॉस्पिटल को बधाई देते हैं। यहाँ पर गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल रोबोटिक्स प्रोग्राम का विकास प्रदर्शित करता है कि बढ़ते अनुभव व्यवस्थित प्रशिक्षण और मल्टीडिसिप्लिनरी सहयोग से अस्पतालों को विभिन्न प्रक्रियाओं में मिनिमली इन्वेजिव सर्जरी का उपयोग करने में कितनी मदद मिल सकती है। पब्लिक हैल्थकेयर में यह प्रगति बहुत उत्साहवर्धक है। इससे दा विंची सर्जिकल सिस्टम के साथ रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुँच सकेगी। आरएमएल हॉस्पिटल्स इस प्रोग्राम के विकास के साथ सर्जरी में विशेषज्ञता बढ़ाने इलाज के नतीजों का मूल्यांकन करने और इस क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा मरीजों को एडवांस्ड गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल केयर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।







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