











































Patient OPD at government hospitals
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में एक साल के भीतर बड़ा इजाफा हुआ है। हॉस्पिटल इनफॉरमेशन सिस्टम (एचआईएस) के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में ओपीडी मरीजों की संख्या 12.7 प्रतिशत और आईपीडी मरीजों की संख्या 19.7 प्रतिशत बढ़ी है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा आमजन को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ब्रजेश पाठक ने एचआईएस के आंकड़े साझा करते हुए बताया वर्ष 2024-25 में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में 23,26,92,346 मरीज पहुंचे थे। वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 26,21,86,275 हो गया। यानी एक वर्ष में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में 2,94,93,929, करीब 2.95 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई।
भर्ती मरीजों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी
गंभीर एवं जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार देने वाली आईपीडी सेवाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां 1,03,06,336 मरीज सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1,23,35,444 पहुंच गई। इस तरह एक साल में आईपीडी में 20,29,108, यानी करीब 20.29 लाख मरीजों की वृद्धि हुई। प्रतिशत के लिहाज से आईपीडी सेवाओं में 19.7 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया।
बेहतर इलाज और आधुनिक सुविधाओं पर जोर
ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में अस्पतालों की सुविधाओं और संसाधनों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से अपग्रेड करने के साथ डायलिसिस पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच की क्षमता बढ़ाई गई है। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सेवाओं को भी बेहतर किया गया है।
योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर फोकस
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं के विस्तार आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार का सीधा लाभ मरीजों को मिल रहा है।







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