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अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल्स ने 500 रोबोटिक नी सर्जरी पूरी कीं, नए मिसो रोबोट का अनावरण

अब अपोलोमेडिक्स क्षेत्र का पहला निजी अस्पताल बन गया है, जहाँ नी रिप्लेसमेंट के लिए दो समर्पित रोबोट सहित कुल तीन सर्जिकल रोबोट काम कर रहे हैं। नई मिसो प्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करती है और डॉक्टरों को रीयल‑टाइम में सर्जिकल सहायता देती है।

हुज़ैफ़ा अबरार
May 04 2026 Updated: May 04 2026 00:05
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अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल्स ने 500 रोबोटिक नी सर्जरी पूरी कीं, नए मिसो रोबोट का अनावरण ApolloMedics Hospitals robotic knee replacement surgeries. team
 
 अपोलोमेडिक्स में अब तीन सर्जिकल रोबोट हो रहे हैं संचालित, इनमें से दो पूरी तरह से नी रिप्लेसमेंट के लिए समर्पित हैं
 अस्पताल ने "रुक जाना नहीं" कार्यक्रम के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया, कार्यक्रम में 400 कष्ट से निजात पाए मरीज आए एक साथ,  सर्जरी के बाद मरीजों ने शास्त्रीय नृत्य का किया प्रदर्शन, उन्होंने पीड़ा रहित गतिशीलता का जश्न मनाने के लिए किया रैंप वॉक भी 
लखनऊ ।अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल्स ने उल्लेखनीय चिकित्सा उपलब्धि हासिल की। इस सुविधा ने 500 रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है। हॉस्पिटल ने इस रिकॉर्ड उपलब्धि का जश्न रुक जाना नहीं नामक एक विशेष कार्यक्रम के साथ मनाया। इस सभा में 400 से अधिक उपचारित मरीज शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल ने बिल्कुल नया मिसो (एमआईएसएसओ) रोबोट लॉन्च किया। अब अपोलोमेडिक्स क्षेत्र का पहला निजी अस्पताल बन गया है, जहाँ नी रिप्लेसमेंट के लिए दो समर्पित रोबोट सहित कुल तीन सर्जिकल रोबोट काम कर रहे हैं। नई मिसो प्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करती है और डॉक्टरों को रीयल‑टाइम में सर्जिकल सहायता देती है। यह तकनीक डॉक्टरों को हर मरीज के घुटने की स्थिति के अनुसार सटीक समायोजन करने की सुविधा प्रदान करती है।  
अपोलोमेडिक्स में ऑर्थोपेडिक्स के चेयरमैन डॉ संजय श्रीवास्तव ने इन 500 सर्जरी का नेतृत्व किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि रोबोटिक सहायता मरीजों के लिए किस तरह वास्तविक अंतर पैदा करती है। यह प्रणाली इम्प्लांट लगाने में सब‑मिलीमीटर स्तर की सटीकता देती है। डॉक्टर सर्जरी से पहले ही 3डी इमेजिंग और सीटी‑आधारित बोन मैपिंग का उपयोग करके पूरी योजना बना लेते हैं। इससे सर्जरी के दौरान मरीजों कम रक्तस्राव होता है, उन्हें कम दर्द होता है और वे जल्दी अस्पताल से छुट्टी पा लेते हैं। इम्प्लांट भी सही स्थिति में बैठते हैं और लंबे समय तक टिकते हैं।  डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा उन्नत तकनीक आने के साथ लोग पारंपरिक तरीकों के बजाय रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह केवल शहरी आबादी तक सीमित नहीं है। टियर‑3 और टियर‑4 कस्बों यहाँ तक कि ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज भी खास तौर पर इसकी मांग कर रहे हैं। जब हमने चार साल पहले शुरुआत की थी, तो पाँच में से केवल एक व्यक्ति ही रोबोटिक प्रक्रिया चाहता था। आज मेरी ओपीडी में आने वाला हर दूसरा मरीज इसके बारे में जानकारी लेता है और केवल रोबोटिक सर्जरी का चुनाव करता है।
रुक जाना नहीं कार्यक्रम ने मरीजों के ठीक होने और उनकी गतिशीलता पर प्रकाश डाला। एक मरीज ने मंच पर लाइव कथक नृत्य किया। घुटने के पुराने दर्द ने पहले उन्हें अपना शास्त्रीय नृत्य अभ्यास रोकने के लिए मजबूर कर दिया था। अन्य मरीजों ने भी अपनी दिनचर्या के बारे में बात की। उन्होंने बिना दर्द के सीढ़ियां चढ़ने और पार्कों में चलने की कहानियां साझा कीं। सर्जरी के बाद मरीजों के एक समूह ने रैंप वॉक भी किया। उन्होंने दर्शकों के सामने अपनी नई गतिशीलता की स्वतंत्रता का प्रदर्शन किया।
अपोलोमेडिक्स के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा हमारा मिशन हमेशा उत्तर प्रदेश के लोगों तक विश्व स्तरीय तकनीक लाना रहा है। डॉ. संजय श्रीवास्तव के असाधारण नेतृत्व में 500 सर्जरी का आंकड़ा पार करना हमारी टीम के लिए गर्व का क्षण है। दूसरे मिसो रोबोट को शामिल करने से रोबोट्स की कुल संख्या तीन हो गई है। यह भारत में सबसे उन्नत और सटीक देखभाल प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। रुक जाना नहीं जैसे कार्यक्रम हमें ठीक यही याद दिलाते हैं कि हमारा मकसद है कि हम अपने मरीजों को बिना किसी रुकावट के चलते, नाचते और जीते हुए देखना चाहते हैं।

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