











































dr Akash Pandita and Dr Sanjay Niranjan
लखनऊ। रविवार को उत्तर प्रदेश नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (UP NNF) द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) यूनिसेफ (UNICEF) TSU एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर राष्ट्रीय पुनर्जीवन दिवस 10 मई 26 को पूरे प्रदेश में बेसिक नवजात पुनर्जीवन कार्यक्रम (Basic NRP) का विशाल राज्यव्यापी प्रशिक्षण अभियान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में 180 से अधिक प्रशिक्षण केंद्रों पर एक साथ आयोजित किया गया जिसमें लगभग 5,000 स्वास्थ्य कर्मियों जिनमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ एवं पैरामेडिकल कर्मी शामिल हुए को नवजात पुनर्जीवन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
यह पहल उत्तर प्रदेश को देश का वह राज्य बनाएगी जहाँ एक ही दिन में नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों की संख्या सर्वाधिक होगी। उत्तर प्रदेश नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के मानद सचिव डॉ. आकाश पंडिता ने कहा यह कार्यक्रम आने वाले वर्षों में नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा उत्तर प्रदेश की Neonatal Mortality Rate (NMR) को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से SNCU जिला अस्पतालों डिलीवरी प्वाइंट्स ग्रामीण एवं छोटे नर्सिंग होम्स में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को अधिक सक्षम आत्मविश्वासी एवं प्रभावी बनाया जाएगा जिससे प्रदेश के प्रत्येक नवजात को बेहतर एवं सुरक्षित शुरुआत मिल सके।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत नवजात पुनर्जीवन की व्यावहारिक तकनीकों, डिलीवरी रूम आपातकालीन प्रबंधन तथा नवजात स्थिरीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण कौशलों पर विशेष ध्यान प्रशिक्षण स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया। जिसमें प्रसव के बाद शिशु में होने वाली दिक्कतों से अवगत कराते हुए डा आकाश ने बताया कि जन्म के बाद 10 प्रतिशत बच्चों में सांस लेने की दिक्कत होती हैं, उससे किस तरह बच्चे का जीवन सुरक्षित किया जाएं के बारे में डेमो द्वारा प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया साथ ही नवजात शिशु को जन्म के बाद किस तरह मां का दूध देना है आदि की जानकारी डेमो के माध्यम से दी गई। उत्तर प्रदेश नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम ने इस महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य अभियान को सफल बनाने हेतु NHM, UNICEF, TSU, जिला स्वास्थ्य प्रशासन एवं सहभागी संस्थाओं के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
मेदांता हॉस्पिटल में यह प्रशिक्षण डा आकाश पंडिता और डा संजय निरंजन के कुशल नेतृत्व में किया गया। डा आकाश ने बताया कि शिशु को जन्म के बाद 6 माह तक सिर्फ मां का दूध देना चाहिए जिससे बच्चे में लोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है और बच्चे की ग्रोथ सही होती है। 6 माह के बाद दाल का पानी चावल का पानी फल और नारियल पानी देना शुरू करें। डिब्बा बंद दूध और फ्रुड कभी नहीं देना चाहिए।
समय पर बच्चे को सभी रोग प्रतिरोधक टीके अवश्य लगवाये। शरीर में कोई भी बदलाव नजर आये तो तत्काल चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास जाएं। इस अवसर पर मेदांता अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ संजय निरंजन ने बताया कि जन्म के बाद बच्चों में सांस लेने की दिक्कत होने पर पम्प द्वारा सांस दिलाने का प्रशिक्षण स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया जिसमें बच्चों में सांस से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सके। जन्म के तीन महीने में शिशु मृत्यु दर 30 प्रतिशत है उसे कम करना इस कार्यशाला का उद्देश्य है।







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