











































प्रतीकात्मकता
गुरुग्राम। एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए डॉ. प्रवीण चंद्रा के नेतृत्व में मेदांता की हार्ट टीम ने नेक्स्ट जनरेशन ड्राई टिश्यू वॉल्व का प्रयोग करते हुए भारत का पहला ट्रांसकैथेटर वॉल्व-इन-वॉल्व (टीएचवी-इन-टीएचवी) प्रोसीजर सफलतापूर्वक पूरा किया है। इससे जिंदगीभर एओर्टिक स्टेनोसिस मैनेजमेंट की जरूरत वाले मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण दिखी है।
जटिल थी स्थिति
57 वर्षीय सुश्री मीरा साहू (परिवर्तित नाम) 2018 से गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से जूझ रही थीं। पहले उन्हें सर्जरी कराने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने और उनके परिवार ने कम इन्वेसिव विकल्प चुना और सेल्फ एक्सपेंडिंग वॉल्व के साथ ट्रांसकैथेटर वॉल्व रिप्लेसमेंट कराने का फैसला लिया। मात्र 6 साल बाद उन्हें फिर डिस्पेनिया और थकान की परेशानी रहने लगी। जांच में पाया गया कि उनका मौजूदा वॉल्व खराब हो गया है, जिससे गंभीर रिगर्जीटेशन (खून का उलटी दिशा में बहाव) हो रहा था और ग्रेडिएंट (वॉल्व में प्रेशर) 42/27 एमएमएचजी तक पहुंच गया था।

दोबारा सर्जरी का सुझाव दिया गया, लेकिन परिवार नहीं माना। मेदांता की हार्ट टीम ने मरीज और उनके परिवार से बात की और नवीनतम ड्राई टिश्यू टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते हुए वॉल्व-इन-वॉल्व तावी की प्रक्रिया पर आगे बढ़ने पर सहमति बनी। इस निर्णय में वॉल्व का टिकाऊपन प्राथमिकता में रहा।
चुनौतियां और सफलता
कोरोनरी आर्टरीज की स्थिति को देखते हुए यह प्रक्रिया जटिल थी। इसमें ब्लॉकेज का रिस्क था। टीम ने ध्यानपूर्वक पूरा प्लान बनाया और बचाव के तौर पर गाइड वायर एवं स्टेंट के जरिये कोरोनरी को सुरक्षित रखा। नए वॉल्व को सफलतापूर्वक इम्प्लांट कर दिया गया, जिससे कोरोनरी फ्लो नॉर्मल हो गया और बिना किसी रिगर्जीटेशन (खून का उलटी तरफ बहाव) के उनका ग्रेडिएंट (वॉल्व में प्रेशर) उल्लेखनीय रूप से कम होकर 7/2 एमएमएचजी पर आ गया।
भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
मेदांता द मेडिसिटी, गुरुग्राम के कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. प्रवीण चंद्रा ने कहा, ‘यह मामला दिखाता है कि कैसे सोच समझकर की गई प्लानिंग, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और टीमवर्क से मरीज को सुरक्षित एवं टिकाऊ समाधान दिया जा सकता है।’
सुश्री साहू की रिकवरी अच्छी रही है और वह सामान्य रूप से अपने दैनिक कार्य कर पा रही हैं। यह दिखाता है कि कैसे तावी थेरेपी से एओर्टिक स्टेनोसिस के मरीजों के लाइफटाइम मैनेजमेंट को सुगम बनाया जा सकता है।
अगर आप या आपका कोई करीबी एओर्टिक स्टेनोसिस से जूझ रहा है, तो डॉक्टर से तावी थेरेपी के बारे में विमर्श करें। यह न्यूनतम इन्वेसिव इलाज है, जिससे सुरक्षा, रिकवरी और बेहतर नतीजे सुनिश्चित होते हैं।







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