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आयुर्वेद गुरु आचार्य मनीष ने लॉन्च किया भारत का पहला पेट-यकृत-प्लीहा शुद्धि किट,

लॉन्च पर आचार्य मनीष ने कहा सिर्फ लक्षणों का इलाज करने से सेहत ठीक नहीं रहती। असली इलाज तब होता है जब हम बीमारी की जड़ तक पहुंचें। आयुर्वेद बताता है कि जब पेट, लिवर और प्लीहा पर भार बढ़ जाता है तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे थकान, सूजन और गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं।

हुज़ैफ़ा अबरार
August 23 2025 Updated: August 23 2025 11:25
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आयुर्वेद गुरु आचार्य मनीष ने लॉन्च किया भारत का पहला पेट-यकृत-प्लीहा शुद्धि किट, भारत का पहला पेट-यकृत-प्लीहा शुद्धि किट लॉन्च करते आयुर्वेद गुरु आचार्य मनीष

लखनऊ। आयुर्वेद और नेचुरोपैथी विशेषज्ञ आचार्य मनीष ने लखनऊ में  आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत का पहला पेट-यकृत-प्लीहा शुद्धि किट लॉन्च किया। यह विशेष किट आंत (पेट), लिवर (यकृत) और प्लीहा (स्प्लीन) की सेहत को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसे बनाने में 20 से अधिक वर्षों का शोध, क्लिनिकल ट्रायल और रोगियों पर सफल परिणाम शामिल हैं। यह किट लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की जड़ तक पहुंचकर इलाज करने के लिए बनाई गई है।

सामान्य दवाओं की तरह यह केवल लक्षणों पर काम नहीं करती बल्कि रोगों को जड़ से ठीक करने और रोकथाम में सहायक है। यह न केवल लंबे समय से बीमार लोगों के लिए बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी बनाई गई है ताकि वे इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर बीमारियों से बच सकें। किट में 4 हफ्तों का एक तयशुदा प्रोटोकॉल है, जो पाचन तंत्र को रीसेट करता है, लिवर को मेटाबॉलिक वेस्ट और हार्मोन प्रोसेसिंग में सहयोग करता है तथा प्लीहा की रोग प्रतिरोधक क्षमता और खून की शुद्धि को मजबूत बनाता है। इससे गैस, एसिडिटी, कब्ज, अपच, मोटापा, लिवर ओवरलोड और कमजोर पाचन जैसी बढ़ती समस्याओं से राहत मिल सकती है।

लॉन्च पर आचार्य मनीष ने कहा सिर्फ लक्षणों का इलाज करने से सेहत ठीक नहीं रहती। असली इलाज तब होता है जब हम बीमारी की जड़ तक पहुंचें। आयुर्वेद बताता है कि जब पेट, लिवर और प्लीहा पर भार बढ़ जाता है तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे थकान, सूजन और गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं। आयुर्वेद ग्रंथ अष्टांग हृदयम में कहा गया है कि सभी रोग पाचन की कमजोरी से शुरू होते हैं, जिससे शरीर में विष जमा होता है। पेट-यकृत-प्लीहा शुद्धि किट इसी संतुलन को रीसेट करने का एक संरचित तरीका है और इसे ट्रिपल डिटॉक्सिफिकेशन के सिद्धांत पर बनाया गया है।
यह किट जीना सीखो लाइफकेयर लिमिटेड ने विकसित की है, जो भारत की तेज़ी से बढ़ती इंटीग्रेटिव हेल्थ कंपनियों में से एक है और स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध है। जीना सीखो ने इसे शोध, क्लिनिकल परीक्षण, डॉक्टर परामर्श और रोगियों को सपोर्ट सेवाओं के साथ बाजार में उतारा है। कंपनी का मकसद है कि हर घर में रोकथाम आधारित और संपूर्ण स्वास्थ्य की प्राथमिकता बने।

इस किट में कुटकी, कालमेघ, हरड़, गिलोय, आंवला और भुम्यामलकी जैसी जड़ी-बूटियों का मिश्रण है, जिनमें लिवर की सुरक्षा, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन सुधारने की खासियत है। इसे आयुष मंत्रालय से मंजूरी मिली है और HIIMS अस्पतालों में वैलिडेट किया गया है।

यह किट शुद्धि ब्रांड की कई अन्य उन्नत आयुर्वेदिक किट्स जैसे डायबिटीज केयर, बीपी केयर, डिप्रेशन और एंग्जायटी केयर, लिवर केयर, किडनी केयर, थायरॉइड केयर, फेफड़े, जोड़, कैंसर, हार्ट, यौन स्वास्थ्य, आंख और इम्युनिटी केयर किट्स की नींव भी है। यह किट अब https://store.jeenasikho.com/, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, टाटा 1mg और देशभर की प्रमुख फार्मेसियों पर उपलब्ध है।

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