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लखनऊ। ब्रेन स्ट्रोक दुनियाभर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है और हर 6 सेकंड में एक व्यक्ति इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देता है। ऐसे में शुरुआती लक्षणों को पहचानना और तुरंत इलाज शुरू करना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी उद्देश्य के साथ अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ ने वर्ल्ड ब्रेन डे के मौके पर ‘प्रयास – एक कोशिश बेहतर ज़िंदगी की’ नाम से एक विशेष अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को ब्रेन स्ट्रोक, उसके शुरुआती संकेत, आपातकालीन प्रतिक्रिया और आधुनिक इलाज की उपलब्ध सुविधाओं के प्रति जागरूक करना है।
इस अवसर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों के व्याख्यान, डेमो प्रदर्शन, स्ट्रोक से उबर चुके मरीजों के अनुभव और अत्याधुनिक स्ट्रोक रिस्पॉन्स सिस्टम की लॉन्चिंग की गई।

न्यूरोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर, डॉ. प्रदीप कुमार ने स्ट्रोक को लेकर जनजागरूकता की कमी पर चिंता जताते हुए कहा, "अधिकतर स्ट्रोक मरीज़ क़ीमती समय गंवा देते हैं क्योंकि वे या उनके परिजन ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते। यदि मरीज़ स्ट्रोक आने के 4 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच जाए, तो समय रहते इलाज से अक्सर पूरी तरह से रिकवरी संभव हो सकती है। इस स्थिति में इलाज जितनी जल्दी शुरू हो जाए, मस्तिष्क को भी उतनी तेजी से बचाया जा सकता है, यानि, "जितना समय बचाया, उतना ही मस्तिष्क बचाया।”
न्यूरो इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के कंसल्टेंट, डॉ. देवांश मिश्रा ने एडवांस स्ट्रोक केयर और समय पर इलाज की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा, “अक्सर लोग स्ट्रोक के शुरुआती संकेत — जैसे बोली में लड़खड़ाहट, एक तरफ़ कमजोरी या चेहरे का टेढ़ा होना — को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, सोचते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन देर से इलाज से स्थायी अपंगता या मृत्यु भी हो सकती है। अगर मरीज़ 4 से 4.5 घंटे की उस ‘क्रिटिकल विंडो’ में स्ट्रोक रेडी हॉस्पिटल पहुंच जाए, तो हम थ्रोम्बोलाइसिस या मैकेनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी जैसी तकनीकों से दिमाग़ में खून का प्रवाह बहाल कर सकते हैं और गंभीर नुक़सान को रोका जा सकता है।”
कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि अपोलो स्ट्रोक रेडी एंबुलेंसेस को झंडी दिखाकर रवाना करना रहा। ये एम्बुलेंस विशेष रूप से स्ट्रोक इमरजेंसी के लिए तैयार की गई हैं और आधुनिक उपकरणों से लैस हैं। इसके साथ ही अस्पताल ने 24x7 सेवा देने वाली स्पेशल स्ट्रोक हेल्पलाइन – 1066 की भी शुरुआत की, जो समय पर एम्बुलेंस पहुंचाने और शुरुआती मदद सुनिश्चित करेगी।
इस पहल का औपचारिक शुभारंभ डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. देवांश मिश्रा, डॉ. अर्पित टौंक, सेकंड इनिंग्स सीनियर सिटिज़न क्लब से श्री अतुल दुबे और शहर के कई प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हुआ।
अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल्स के एमडी और सीईओ, डॉ. मयंक सोमानी ने इस अवसर पर कहा, “अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊ में हम 24x7 स्ट्रोक के मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। हमारे पास स्ट्रोक से निपटने के लिए समर्पित एम्बुलेंस, आधुनिक कैथ लैब्स, और प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम है। समय पर इलाज से स्ट्रोक के मरीज़ों को एक नई ज़िंदगी दी जा सकती है और यही हमरा निरंतर प्रयास है।”
कार्यक्रम का समापन स्ट्रोक रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल के लाइव प्रदर्शन, स्ट्रोक से उबर चुके मरीजों की प्रेरणादायक कहानियों और हाई-टी सेशन के साथ हुआ, इस दौरान ब्रेन स्ट्रोक की रोकथाम, सतर्कता और समय पर इलाज को लेकर खुलकर चर्चा हुई।







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