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लखनऊ। राजधानी के ट्रॉमा सेंटर से फिर एक बार असंवेदनशीलता की खबर आई है। परिजनों का आरोप है कि 19 साल के युवक को 12 घंटे तक खून नहीं चढ़ाया गया जिससे उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वह भी तब जबकि परिजन ब्लड डोनर कार्ड लेकर भटकते रहे।
प्रयागराज निवासी 19 साल के आदित्य को अप्लास्टिक एनीमिया हो गया था। हालत बिगड़ने पर उसे केजीएमयू (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। राजेंद्र बेटे आदित्य को लेकर देर रात ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। ट्रॉमा कैजुअल्टी में जाँच के दौरान आदित्य का हीमोग्लोबिन स्तर लगभग तीन के आसपास था। डॉक्टर्स ने तुरंत परिजनों से खून की व्यवस्था करने को कहा।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर (trauma center) में गंभीर हालत में लाए गए युवक को 12 घंटे तक खून नहीं चढ़ सका। उसका हीमोग्लोबिन बेहद कम था। परिजन अस्पताल में डोनर कार्ड (blood donor card) लेकर भटकते रहे, मगर उन्हें खून नहीं मिल पाया।
राजेंद्र का आरोप है कि जूनियर डॉक्टर्स ने इलाज में कोताही (attendants complain) बरती। ब्लड बैंक से खून दिलवाने में कोई मदद नहीं की। परिजनों ने डोनर कार्ड दिखाए, मगर जूनियर डॉक्टर नहीं माने। पूरी रात परिजन उसे लेकर कैजुअल्टी (trauma center casualty) में ही पड़े रहे और फिर आदित्य की मौत (death in trauma center) हो गई।
डॉ सुधीर कुमार सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू ने आरोप के सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि ऐसा संभव नहीं है कि मरीज को इलाज न मिला हो। तीमारदार शिकायत करेंगे तो संबंधित जूनियर डॉक्टर्स (junior doctors) पर कार्यवाही की संस्तुति की जाएगी। वहीं दूसरी और पिता राजेंद्र ने बिलखते हुए कहा कि यदि बेटे आदित्य को दो यूनिट खून चढ़ गया होता तो उसकी जान बच जाती।







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