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कानपुर। भारत में कुछ दशकों से डिमेंशिया यानि मस्तिष्क स्वास्थ्य के मामलों में तेज़ वृद्धि चिंता का विषय है। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए रीजेंसी हेल्थ कानपुर के विशेषज्ञों ने मस्तिष्क स्वास्थ्य की सुरक्षा और संज्ञानात्मक क्षमताओं में गिरावट (कॉग्निटिव डिक्लाइन) की समय रहते पहचान के प्रति जागरूकता पर जोर दिया है। हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों ने कहा 40 वर्ष से ज़्यादा आयु के लोगों ख़ास कर उन लोगों को जो किसी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं या जिनके परिवार में न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का इतिहास रहा है, उन्हें ऐसे उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं जो लंबे समय तक मस्तिष्क और याददाश्त को बेहतर बनाए रखने में मदद करें। विशेषज्ञों ने कहा किसी भी शुरुआती लक्षण या समस्या के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब देश में डिमेंशिया के मामले सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहे हैं। अनुमान के मुताबिक लगभग 5.3 मिलियन भारतीय डिमेंशिया से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा लोगों के बीच इस बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी और जांच न होने से बहुत कम है। जब जीवन प्रत्याशा यानी औसत उम्र बढ़ती है तो लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां जैसे हाइपरटेंशन डायबिटीज मोटापा और हृदय की बीमारियां ज्यादा होती हैं। कॉग्निटिव डिसऑर्डर का खतरा बढ़ने का खतरा रहता है। इसके बावजूद मस्तिष्क स्वास्थ्य के बारे में बातचीत कम होती है, और कई लोग स्पेशल केयर तभी लेते हैं जब लक्षण रोज़ाना के काम में रुकावट डालने लगते हैं।
रीजेंसी हेल्थ कानपुर के न्यूरोसर्जरी के सीनियर डायरेक्टर डॉ जयंत वर्मा ने कहा डिमेंशिया खुद पता नहीं चलता। जब तक परिवार को इसके लक्षण दिखते हैं, तब तक यह बीमारी अक्सर सालों से चुपचाप बढ़ रही होती है। हमारा उद्देश्य बातचीत को इलाज से बचाव की ओर ले जाना और लोगों को ज़िंदगी में बहुत पहले ही मस्तिष्क स्वास्थ्य के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करना है। जैसे लोग अपने हृदय की सेहत ब्लड शुगर लेवल पर नज़र रखते हैं, वैसे ही उन्हें उन बातों पर भी ध्यान देना चाहिए जो कॉग्निटिव सेहत पर असर डालती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, योग मेडिटेशन पढ़ने और नंबर-बेस्ड पज़ल्स से मेंटल स्टिम्युलेशन साथ ही क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी इलाज़ मस्तिष्क स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसकी जागरूकता लोगों को खतरों को जल्दी पहचानने और उम्र बढ़ने के साथ अपनी ज़िंदगी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सही कदम उठाने में मदद कर सकती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार डिमेंशिया का खतरा कई ऐसे कारणों से जुड़ा होता है जिन्हें स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाकर और मौजूदा बीमारियों का सही इलाज कर कम कर सकते है। जैसे नियमित व्यायाम योग, ध्यान, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और लोगों के साथ जुड़े रहना दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञ पढ़ने नई चीजें सीखने और दिमागी खेल या पहेलियां हल करने जैसी गतिविधियों की सलाह दी हैं, क्योंकि ये दिमाग को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं। याददाश्त या सोचने-समझने से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय पर डॉक्टर से जांच करवाने से सही देखभाल और मदद मिल सकती है।
जैसे-जैसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के बारे में जागरूकता बढ़ रही है, एक्सपर्ट्स इस बात पर ज़ोर देते हैं कि मस्तिष्क स्वास्थ्य की रोकथाम रूटीन हेल्थकेयर का ज़रूरी हिस्सा बन जानी चाहिए। रीजेंसी हेल्थ कानपुर का मानना है कि डिमेंशिया के रिस्क फैक्टर्स और शुरुआती लक्षणों के बारे में ज़्यादा समझ लोगों और परिवारों को सोच-समझकर फ़ैसले लेने में मदद कर सकती है, जिससे स्वस्थ उम्र बढ़ने (हेल्दी एजिंग) और बेहतर जीवन की गुणवत्ता में मदद मिल सके।







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