












































प्रतीकात्मक
कोविड-19 के संक्रमण को हराकर ठीक हुए लोगों पर एक चौकाने वाला शोध सामने आया है। इस शोध के अनुसार कोरोना वाइरस मष्तिष्क पर बुरा असर डाल रहा है।
पोस्ट कोविड लक्षणों पर हुए हालिया शोध को लेकर एक हैरान करने वाली रिपोर्ट आई है, जिसके मुताबिक लोगों को सोचने और ध्यान देने में परेशानी जैसी दिक्कतों का शिकार होना पड़ रहा है। कई लोगों में मेमोरी लॉस के लक्षण भी देखने को मिले है। दुनिया के कई देशों में कोरोना महामारी पर लगातार शोध जारी है।
वैज्ञानिक हाल के दिनों में सामने आई एक नयी स्थिति ‘लंबे कोविड’ को लेकर बेहद चिंतित हैं। मरीजों को लंबे समय तक इस बीमारी के लक्षणों से जूझना पड़ता है। रिसर्च से पता चलता है कि कम से कम 5 से 24% लोगों में तीन से चार महीने बाद तक कोरोना के लक्षण बने रहते हैं।
मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को वेंटिलेटर पर रखा गया, उनमें चीजों को पहचानने की क्षमता सबसे अधिक प्रभावित हुई। शोध के मुताबिक, 'स्टडी में कई पहलुओं की पड़ताल हुई जिसमें पता चला कि कोरोना मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है। विभिन्न पहलुओं को देखते हुए ये संकेत मिलता है कि मस्तिष्क पर कोविड-19 के कुछ महत्वपूर्ण प्रभाव होते हैं जिसमें अभी और शोध की जरूरत है।
एक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के गंभीर लक्षणों से प्रभावित रहे लोग ऑनलाइन एक्जाम की सीरीज में कम नंबर हासिल कर सके इससे उनके प्रदर्शन और मुश्किलों यानी मुसीबतों का हल निकालने की क्षमता पर सबसे बुरा असर पड़ा।
संक्रमण को हराकर ठीक हुए लोगों को सोचने और ध्यान देने में परेशानी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।







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