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लखनऊ। वेलनेस (Wellness) का अर्थ केवल बीमारी से मुक्त होना नहीं, बल्कि शारीरिक मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीना है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच वेलनेस के महत्वपूर्ण आधार हैं। एक स्वस्थ जीवनशैली हमें अधिक ऊर्जावान, खुश और बेहतर जीवन जीने में मदद करती है। इसी महत्वपूर्ण विषय को चुनकर खुशबू ने अपनी पीएचडी पूर्ण की। योग की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता केवल वेलनेस के चलन को बढ़ावा नहीं दे रही, बल्कि यह एक समाजशास्त्रीय घटना के रूप में उभर रही है। यह बात वेलनेस टूरिज्म पर खुशबू द्वारा किए शोध में सामने आई है। खुशबू को शनिवार को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के दीक्षांत समारोह में पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई। वैश्वीकरण ने भारत की पारंपरिक योग पद्धतियों को वैश्विक वेलनेस और पर्यटन अनुभव में बदला।
वेलनेस (Wellness) का अर्थ केवल बीमारी या रोग से मुक्त होना नहीं है, बल्कि यह शरीर मन और आत्मा का एक समग्र (Holistic) और सक्रिय संतुलन है। शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य सामाजिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को समझ कर संतुलित जीवन रोग मुक्त होता है। खुशबू के शोध ने भारत में वेलनेस टूरिज्म और उसके समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि किस तरह वैश्वीकरण ने योग को उसकी भारतीय सांस्कृतिक दार्शनिक और आध्यात्मिक जड़ों से निकालकर एक वैश्विक वेलनेस उत्पाद और पर्यटन अनुभव के रूप में विकसित किया है। शोध में बताया कि योग आधारित वेलनेस टूरिज्म के विस्तार पर वैश्विक आवागमन उपभोक्ता संस्कृति स्वास्थ्य को लेकर बदलती सोच बदलती जीवनशैली और डिजिटल माध्यमों का प्रभाव पड़ा है। साथ ही आधुनिक जीवन के तनाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य जीवन में उद्देश्य और बेहतर जीवनशैली की तलाश इसके बढ़ते प्रभाव का महत्वपूर्ण कारण है।
अपने शोध के लिए खुशबू ने देश के प्रदेशो में व्यापक स्तर पर जमीनी अध्ययन किया। वेलनेस टूरिज्म अभी भी अकादमिक अध्ययन का अपेक्षाकृत नया क्षेत्र है और इसके सामाजिक पहलुओं पर विशेष रूप से उपलब्ध साहित्य भी सीमित है। ऐसे में उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कर इस क्षेत्र को जमीनी स्तर पर समझने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने वेलनेस टूरिज्म से जुड़े लोगों से बातचीत कर उनके अनुभवों काम करने के तरीकों तथा स्थानीय समुदायों पर इस क्षेत्र के प्रभाव का अध्ययन किया। जमीनी अनुभवों और विस्तृत अकादमिक अध्ययन को उनके शोध की आधारशिला माना गया है। खुशबू के शोध का निष्कर्ष है कि योग आधारित वेलनेस टूरिज्म को केवल घूमने-फिरने या मनोरंजन की गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसके बजाये यह एक जटिल सामाजिक घटना है, जो यात्रा के बदलते तौर-तरीकों उपभोक्ता व्यवहार स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और व्यक्तिगत जीवनशैली में आए बदलावों से प्रभावित हो रही है।
खुशबू की अकादमिक यात्रा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से जुड़ी रही है। उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एमफिल की पढ़ाई पूरी की और अपने उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने समाजशास्त्र और टूरिज्म मैनेजमेंट में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की है और समाजशास्त्र में यूजीसी-नेट भी क्वालिफाई किया है। वर्तमान में वह एसआरएम यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। पीएचडी की डिग्री मिलने पर खुशबू ने अपने शोध गाइड अध्यापकों और विश्वविद्यालय का मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी अकादमिक यात्रा में परिवार के निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग के लिए आभार जताया। खुशबू ने अपनी पीएचडी की डिग्री अपने माता-पिता को समर्पित करते हुए कहा उनका विश्वास सहयोग और आशीर्वाद उनकी पूरी अकादमिक यात्रा में उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है।







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