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रीजेंसी में 66 वर्षीय हाई-रिस्क महिला के जन्मजात हृदय दोष का उपचार

मरीज मोटापे और ओबेसिटी हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम से भी पीड़ित थी। मरीज में एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट की संरचना अत्यधिक असंतुलित थी तथा इंटरएट्रियल सेप्टम लचीला था, जिससे डिवाइस को सही स्थान पर स्थिरता से स्थापित करना तकनीकी रूप से कठिन था। टीईई की सहायता से डिवाइस के चयन ने हमें बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सुरक्षित रूप से मिनिमली इनवेसिव ट्रांसकैथेटर क्लोजर करने में सक्षम बनाया।

हुज़ैफ़ा अबरार
August 06 2026 Updated: August 06 2026 00:21
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रीजेंसी में 66 वर्षीय हाई-रिस्क महिला के जन्मजात हृदय दोष का उपचार Dr. Abhineet Gupt

कानपुर। रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने 66 वर्षीय महिला के जन्मजात हृदय रोग ओस्टियम सेकंडम एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट का अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव ट्रांसकैथेटर एएसडी डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया के माध्यम से सफल उपचार किया। यह जन्मजात हृदय दोष हृदय के ऊपरी दोनों कक्षों (एट्रिया) के बीच असामान्य छेद होने के कारण होता है, जिससे रक्त का प्रवाह असामान्य हो जाता है। यह जटिल प्रक्रिया रीजेंसी हेल्थ कानपुर के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. अभिनीत गुप्ता द्वारा सफलतापूर्वक की गई, जिसने इस हाई-रिस्क मरीज के लिए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प प्रदान किया। मरीज को जन्मजात हृदय दोष से संबंधित लक्षणों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच और डायग्नोस्टिक परीक्षणों के बाद मरीज में बड़े आकार के ओस्टियम सेकंडम एएसडी की पुष्टि हुई। प्रक्रिया से पहले ट्रांसइसोफेगल इकोकार्डियोग्राफी से हृदय की विस्तृत जांच की गई, जिसमें भोजन नली (इसोफेगस) के जरिए अल्ट्रासाउंड द्वारा हृदय की स्पष्ट तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं। जांच में हृदय की सेप्टल संरचना उपयुक्त पाई गई, जिससे मरीज को मिनिमली इनवेसिव ट्रांसकैथेटर प्रक्रिया के लिए उपयुक्त माना गया। मामला कई गंभीर सह-रोगों (कॉमॉर्बिडिटीज़) के कारण चुनौतीपूर्ण था।

मरीज मोटापे और ओबेसिटी हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम से भी पीड़ित थी। मरीज में एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट की संरचना अत्यधिक असंतुलित थी तथा इंटरएट्रियल सेप्टम लचीला था, जिससे डिवाइस को सही स्थान पर स्थिरता से स्थापित करना तकनीकी रूप से कठिन था। टीईई की सहायता से डिवाइस के चयन ने हमें बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सुरक्षित रूप से मिनिमली इनवेसिव ट्रांसकैथेटर क्लोजर करने में सक्षम बनाया। रीजेंसी हेल्थ कानपुर के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. अभिनीत गुप्ता ने कहा हाई-रिस्क मरीजों में जटिल एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट का उपचार अत्यंत सावधानीपूर्वक योजना सटीक इमेजिंग और अनुभवी इंटरवेंशनल विशेषज्ञता की मांग करता है। टीईई की सहायता से विस्तृत मूल्यांकन और उचित आकार के डिवाइस के चयन ने हमें बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सुरक्षित रूप से मिनिमली इनवेसिव ट्रांसकैथेटर क्लोजर करने में सक्षम बनाया। बुजुर्ग मरीजों और कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए यह तकनीक विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि इसमें छोटा चीरा कम शारीरिक आघात अस्पताल में कम समय तक भर्ती तेज़ रिकवरी और सर्जरी से जुड़े कम जोखिम जैसे कई फायदे मिलते हैं। समय पर जांच और अनुभवी स्ट्रक्चरल हार्ट विशेषज्ञों से परामर्श लेने पर जन्मजात हृदय दोष के जटिल मामलों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

तैयारियों के बाद कार्डियोलॉजी टीम ने ट्रांसकैथेटर एएसडी डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। जटिल शारीरिक संरचना को ध्यान में रखते हुए थोड़ा बड़ा आकार का कोकून सेप्टल ऑक्लूडर  निरंतर फ्लोरोस्कोपी की निगरानी में प्रत्यारोपित किया गया, जिससे डिवाइस को सही स्थान पर सटीकता और स्थिरता के साथ स्थापित किया जा सका। पूरी प्रक्रिया बिना किसी तत्काल जटिलता के सफलतापूर्वक संपन्न हुई। प्रक्रिया के बाद की जांच में डिवाइस की स्थिति पूरी तरह स्थिर पाई गई। इकोकार्डियोग्राफी में हृदय के दोनों कक्षों के बीच रक्त का असामान्य प्रवाह पूरी तरह समाप्त हो गया तथा किसी भी प्रकार का अवशिष्ट रिसाव नहीं पाया गया। प्रक्रिया के दौरान मरीज की हृदय एवं रक्त संचार प्रणाली पूरी तरह स्थिर रही और उपचार के बाद उनकी रिकवरी संतोषजनक रही। मामले के सफल उपचार ने एक बार फिर रीजेंसी हेल्थ कानपुर की उन्नत स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन सेवाओं में विशेषज्ञता और अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के माध्यम से विश्वस्तरीय हृदय उपचार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को सिद्ध किया है। आधुनिक कैथेटर-आधारित प्रक्रियाओं के माध्यम से अस्पताल जटिल जन्मजात एवं संरचनात्मक हृदय रोगों से पीड़ित, विशेष रूप से ओपन हार्ट सर्जरी के लिए हाई-रिस्क माने जाने वाले मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

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