











































Dr. Shalini Singh
लखनऊ। रीजेंसी हेल्थ ने स्त्री रोग से संबंधित मुश्किल बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज़ कर अपनी मेडिकल क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया है। दरअसल डीप इनफिल्ट्रेटिंग एंडोमेट्रियोसिस की वजह से गंभीर क्रोनिक पेल्विक दर्द से ग्रसित 50 वर्षीय महिला का इलाज़ रीजेंसी हेल्थ लखनऊ में हुआ। यह बीमारी एंडोमेट्रियोसिस का एक गंभीर रूप होती है। इसमें यह बीमारी पेल्विक ऊतकों और आस-पास की बनावट में गहराई तक फैल जाती है। लंबे समय तक इलाज कई मेडिकल कंसल्टेशन और अल्ट्रासाउंड में सामान्य नतीजे आते थे इसलिए इस बीमारी का सटीक तरीके से पता नहीं चल पाता था।
इस मामले में 50 वर्षीया मरीज़ पिछले 8 साल से गंभीर डिसमेनोरिया जो मासिक धर्म के दौरान बहुत तेज दर्द को कहते हैं से पीड़ित थी। इसके अलावा उन्हें पिछले 6 महीने से गंभीर पेल्विक दर्द लगातार होता था। उनकी हालत इतनी बुरी हो गई थी कि वह सही से चल भी नहीं पाती थी और अपनी रोजमर्रा की चीजें भी नहीं कर पाती थी। काफी समय तक इलाज करने के बावजूद और कई डॉक्टर से कंसल्ट करने के बाद भी उनके लक्षण खराब होते गए और कोई खास सुधार नहीं देखा गया। कई मेडिकल जांच या अल्ट्रासोनोग्राफी के जरिए भी उनमें बीमारी की पहचान नहीं हो पाई थी। रीजेंसी हेल्थ लखनऊ में जांच के बाद मरीज़ का मूल्यांकन डॉ. शालिनी सिंह कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी ने की। उन्होंने यूटेरोसैक्रल लिगामेंट्स में गहरे एंडोमेट्रियोसिस के क्लीनिकल लक्षण देखे। यह गर्भाशय (यूटेरस) के पीछे मौजूद ज़रूरी सपोर्टिव संरचना होती हैं और पेल्विक स्टेबिलिटी बनाए रखने में मदद करती है। गायनेकोलॉजिकल जांच के दौरान यूटेरोसैक्रल लिगामेंट्स मोटे, सख्त और बहुत नरम पाए गए, जिससे अल्ट्रासाउंड सामान्य दिखने के बावजूद छिपे हुए एंडोमेट्रियोसिस का पता चला।
जांच के नतीजों के आधार पर मेडिकल टीम ने एक लैप्रोस्कोपिक एंडोमेट्रियोसिस एक्सिशन सर्जरी करने की योजना बनाई। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया होती है जिसे छोटे चीरों से कैमरे और खास सर्जिकल उपकरणों का इस्तेमाल करके किया जाता है। यह डायग्नोस्टिक और थेराप्यूटिक दोनों के लिए कारगर है। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की टीम ने पाया कि एंडोमेट्रियोसिस बीमारी गर्भाशय को सहारा देने वाले लिगामेंट्स तक फैल चुकी थी। इसके अलावा पेल्विक हिस्से की अंदरूनी परत में भी असामान्य एंडोमेट्रियल टिश्यू फैल गया था। जांच में पता चला कि क्रोनिक सूजन और बीमारी के कारण एक ओवरी बाईं पेल्विक दीवार से चिपक गई थी। डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए बीमारी से प्रभावित सभी हिस्सों और घावों को सफलतापूर्वक हटा दिया। रीजेंसी हेल्थ की ऑब्सट्रिक्स & गायनेकोलॉजी कंसलटेंट डॉ शालिनी सिंह ने कहा डीप इनफिल्ट्रेटिंग एंडोमेट्रियोसिस का पता लगाना खास तौर पर मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह अक्सर रूटीन अल्ट्रासाउंड स्कैन में दिखाई नहीं देता। जिन महिलाओं को इलाज के बाद भी लगातार पेल्विक दर्द बना रहता है, उनके लिए एक विस्तृत चिकित्सीय जांच बहुत ज़रूरी हो जाती है। इस मामले में सावधानीपूर्वक की गई जांच से हमें बीमारी की असली वजह का पता लगाने और समय पर सर्जरी की योजना बनाने में मदद मिली। जटिल एंडोमेट्रियोसिस के निदान और इलाज दोनों के लिए लैप्रोस्कोपिक एक्सिशन सर्जरी को सबसे बेहतरीन तरीका माना जाता है। बीमारी को पूरी तरह से हटा देने से मरीज़ को लंबे समय से चले आ रहे दर्द से काफी राहत मिली।
सर्जरी के बाद क्रोनिक पेल्विक दर्द से मरीज़ को काफ़ी राहत मिली। अब वह बिना किसी परेशानी के रोजाना के कामों को आसानी से कर पाती हैं। उनकी रिकवरी बिना किसी रुकावट के काफ़ी अच्छी रही। सर्जरी के अगले दिन ही स्थित हालत में उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इस मामले का सफ़ल इलाज़ यह दर्शाता है कि जिन महिलाओं को लंबे समय से पेल्विक दर्द हो रहा हो उनकी विशेष गायनेकोलॉजिकल (स्त्री रोग) जांच बहुत जरूरी होती है, भले ही सामान्य स्कैन और टेस्ट सही दिखाई दें। यह मामला यह बताता है कि आधुनिक और कम चीरा लगाने वाली सर्जरी जटिल स्त्री रोगों के इलाज में काफी मददगार साबित हो रही है। इससे मरीज जल्दी ठीक होते हैं डीप इनफिल्ट्रेटिंग एंडोमेट्रियोसिस की वजह से गंभीर क्रोनिक पेल्विक दर्द से ग्रसित 50 वर्षीय महिला का इलाज़ रीजेंसी हेल्थ लखनऊ में हुआ। यह बीमारी एंडोमेट्रियोसिस का एक गंभीर रूप होती है। इसमें यह बीमारी पेल्विक ऊतकों और आस-पास की बनावट में गहराई तक फैल जाती है।
लंबे समय तक इलाज कई मेडिकल कंसल्टेशन और अल्ट्रासाउंड में सामान्य नतीजे आते थे इसलिए इस बीमारी का सटीक तरीके से पता नहीं चल पाता था। सर्जरी के बाद दर्द और परेशानी कम होती है और उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है। इस तरह के आधुनिक इलाज और एडवांस्ड मेडिकल सुविधाओं के जरिए रीजेंसी हेल्थ महिलाओं की जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के लिए मरीज़-केंद्रित और साक्ष्य आधारित इलाज प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को लगातार मजबूत बना रहा है।







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