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गोरखपुर। कई गंभीर बीमारियों में कारगर माने जाने वाले आयुर्वेद के पंचकर्म चिकित्सा की विश्व स्तरीय सुविधा अब गोरखपुर में भी मिलने लगी है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के आयुर्वेद कॉलेज (गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) के पंचकर्म केंद्र में रोगियों को इस महत्वपूर्ण सेवा का लाभ सिर्फ लागत दर पर मिल रहा है। यहां के पंचकर्म केंद्र का औपचारिक लोकार्पण 01 जुलाई को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के हाथों होने जा रहा है।
गोरखपुर में पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा कतिपय स्थानीय संस्थानों में मिल रही थी। इसे वैश्विक स्तर की सुविधाओं से जोड़ने की पहल महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के आयुर्वेद कॉलेज में की गई। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं और उनके विजन के अनुरूप यहां जिस तरह से पंचकर्म केंद्र को शुरू किया है वह इस चिकित्सा पद्धति में प्रसिद्ध दक्षिण भारत से भी बेहतरीन है। एमजीयूजी के आयुर्वेद कॉलेज में पंचकर्म के लिए जो केंद्र बनाया गया है उसमें 11 कॉटेज, अलग-अलग पुरुष और महिला चिकित्सा कक्ष, तैयारी कक्ष और दो परामर्श कक्ष शामिल हैं।
क्या है पंचकर्म
पंचकर्म भारत के प्राचीन आयुर्वेद विज्ञान के अंतर्गत एक प्राथमिक उपचार पद्धति है। यह मन, शरीर और चेतना के लिए संतुलन कायाकल्प प्रदान करता है। ये उपचार शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं और मानक संतुलन को बहाल करते हैं। स्वास्थ्य में सुधार करते हैं, प्रतिरक्षा को मजबूत करते हैं, तनाव के नकारात्मक प्रभावों को उलटते हैं। पंचकर्म चिकित्सा रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए भी जानी जाती है।
पंचकर्म केंद्र के प्रभारी डॉ. श्रीधर बताते हैं कि यहां नसों की बीमारी, मोटापा, अस्थमा, जोड़ों का दर्द, गठिया, सियाटिका, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, चर्म रोग, मानसिक तनाव, स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी के रोग, थायराइड, मधुमेह, कंधे का दर्द, यूरिक एसिड, नपुंसकता आदि का इलाज पंचकर्म में निहित पांच प्रक्रियाओं (वमन, विरेचन, नस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण) द्वारा किया जा रहा है। डॉ. श्रीधर बताते हैं कि यहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा यूपी के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से भी लोग आ रहे हैं।
दर्दनाक बीमारी ट्राइजेमिनल न्यूरोलजिया तक का संतुष्टिप्रद इलाज
एमजीयूजी के आयुर्वेद कॉलेज के पंचकर्म केंद्र में प्रतिदिन औसतन 50 पंचकर्म प्रक्रियाएं हो रही हैं। यहां इलाज कराने वालों में कई ऐसे भी हैं जो कई बड़े अस्पताल और डॉक्टरों के यहां चक्कर लगाने के बाद भी निराश होने लगे थे। उदाहरण के तौर पर कानपुर की आकांक्षा तेरह सालों से दर्दनाक बीमारी ट्राइजेमिनल न्यूरोलजिया से पीड़ित थीं। इस बीमारी में चेहरे पर बर्दाश्त के बाहर झन्नाटेदार तेज दर्द होता है। आकांक्षा देश मे कई डॉक्टरों को दिखा चुकी थीं लेकिन दर्द से राहत नहीं मिल रही थी। नौबत सर्जरी कराने की आ गई थी। उन्हें एमजीयूजी के आयुर्वेद कॉलेज में विश्व स्तरीय पंचकर्म चिकित्सा की जानकारी हुई तो सिर्फ आजमाने के लिए उन्होंने यहां पंचकर्म की सेवा ली। पंद्रह दिन के इलाज के बाद आकांक्षा का कहना है कि वह दर्द से निजात पा चुकी हैं और अब उन्हें सर्जरी कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।







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