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तुरंत जांच व इलाज की रणनीति से होगा मलेरिया उन्मूलन 

नई राष्ट्रीय रणनीति योजना को अपनाकर बीते चार-पांच सालों में प्रदेश में मलेरिया के मरीजों की संख्या में तकरीबन सात गुना की गिरावट आई  टेस्ट, ट्रीट व ट्रैक” अर्थात प्रत्येक संदिग्ध मरीज की जांच, पुष्ट मामलों का उपचार और उनकी निगरानी दूसरी अहम रणनीति।

हुज़ैफ़ा अबरार
April 26 2026 Updated: April 26 2026 11:29
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तुरंत जांच व इलाज की रणनीति से होगा मलेरिया उन्मूलन  malaria mosquito image india

लखनऊ । मच्छरजनित बीमारी मलेरिया का देश-प्रदेश से वर्ष 2030 तक उन्मूलन करने के लक्ष्य के मद्देनजर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय योजना 2023–27 की तुरंत पहचान व इलाज की रणनीति काफी कारगर साबित हो रही है। बीते चार-पांच सालों में प्रदेश में मलेरिया के मरीजों की संख्या में तकरीबन सात गुना की गिरावट आई है जो उन्मूलन की दिशा में शुभ संकेत हैं। 

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध भौगोलिक परिदृश्य वाले राज्य में मलेरिया नियंत्रण सतत और बहु-आयामी प्रक्रिया रही है, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। यह प्रगति स्वास्थ्य विभाग, फील्ड कार्यकर्ताओं और समुदाय की साझेदारी का परिणाम है। संयुक्त निदेशक डॉ. विकास सिंघल के अनुसार समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, लेकिन उचित जांच और समयबद्ध उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए मलेरिया नियंत्रण का मूल आधार है, समय पर पहचान, सटीक जांच और पूर्ण उपचार।
मलेरिया नियंत्रण के लिए नई राष्ट्रीय रणनीति योजना 2023–27 में भी इसको स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। इस रणनीति का प्रमुख आधार है निगरानी को मुख्य हस्तक्षेप के रूप में स्थापित करना। यानि एक दिन के भीतर केस की सूचना, तीन दिन के भीतर जांच और सात दिन के भीतर फोकस क्षेत्र में आवश्यक नियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं। रणनीति का दूसरा अहम स्तंभ है टेस्ट, ट्रीट व ट्रैक अर्थात प्रत्येक संदिग्ध मरीज की जांच, पुष्ट मामलों का उपचार और उनकी निगरानी। आशा एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अब दूरदराज के क्षेत्रों में भी त्वरित जांच सुनिश्चित कर रहे हैं। रणनीति का तीसरा स्तंभ मलेरिया की रोकथाम को सुदृढ़ करना है, जिसके अंतर्गत इंटीग्रेटेड वेक्टर मैनेजमेंट अपनाया जा रहा है। इसमें मच्छरों की प्रजातियों, उनके प्रजनन स्थलों और कीटनाशक प्रतिरोध की निगरानी की जाती है तथा लार्वा नियंत्रण जैसे उपायों को क्षेत्र विशेष के अनुसार लागू किया जाता है। इससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में मदद मिलती है। 
इसी रणनीति को लागू कराकर प्रदेश में मलेरिया की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2019 में जहां मलेरिया के 92,000 से अधिक मामले सामने आए थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या घटकर 14500 के आसपास रह गई है। यह गिरावट केवल आंकड़ों का परिवर्तन नहीं, बल्कि सुदृढ़ निगरानी प्रणाली, बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधाओं और लगातार किए जा रहे वेक्टर नियंत्रण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।   
 
निगरानी तंत्र में सुधार को वार्षिक रक्त परीक्षण दर में वृद्धि से भी समझा जा सकता है। वर्ष 2019 में जहां यह दर 2.51% थी, वर्ष 2025 में बढ़कर 7.8% तक पहुंच गई है, जो 7% के राष्ट्रीय लक्ष्य से अधिक है। इसके साथ ही, टेस्ट पॉजिटिविटी रेट लगातार 0.25% से नीचे बना हुआ है, जो अत्यंत संवेदनशील और प्रभावी निगरानी का संकेत है। इसका अर्थ है कि अधिक संख्या में लोगों की जांच हो रही है और संक्रमण की पहचान प्रारंभिक स्तर पर ही की जा रही है।
इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन सहयोगियों के साथ मिलकर एक अभियान शुरू कर रहा है-मलेरिया को खत्म करने का संकल्प, अब हम कर सकते हैं। अब हमें करना ही होगा।" यह एक ऐसी पुकार है जो हमें मलेरिया-मुक्त भविष्य के लिए प्रेरित करती है। 
मलेरिया के बारे में
मलेरिया संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह रोग मुख्यतः उन क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है जहां जलभराव, स्वच्छता की कमी और पर्यावरणीय परिस्थितियां मच्छरों के प्रजनन के अनुकूल होती हैं। मलेरिया नियंत्रण में सामुदायिक सहभागिता अत्यंत जरूरी है। जलभराव को रोकना, कूलर और अन्य जल स्रोतों की नियमित सफाई, मच्छरदानी का उपयोग और व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय अपनाना संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक है।

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