











































एनीमिया मरीज को आयरन की सुई लगती नर्स
लखनऊ। एक डोज़, दो ज़िंदगी का वरदान के मंत्र के साथ एनीमिया जैसी गंभीर चुनौती पर मीडिया सहयोगियों को संवेदित करने और उनके एनीमिया मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम को सफल बनाने में मीडिया द्वारा दिए जाने वाले सहयोग हेतु आज स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज संस्था द्वारा लखनऊ में राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में किया गया। इस बैठक में निदेशक, गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंस (जीएमएस), महाप्रबंधक, राष्ट्रीय कार्यक्रम; महाप्रबंधक एमआईएस उप-महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, टेक्निकल एक्सपर्ट, सहयोगी संस्थाएं और स्थानीय मीडिया सहयोगी शामिल हुए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार एनीमिया की दर को कम करने और इसके प्रबंधन हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एनीमिया मुक्त भारत (AMB) के तहत एनीमिया नियंत्रण को प्राथमिकता दी है और राज्य में ए.एन.एम्., आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन, डीवॉर्मिंग, पोषण परामर्श और जांच सेवाओं को मजबूत किया गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 83.4% प्रसव सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में होते हैं, जिससे प्रसव सुरक्षित होता है और माताओं और बच्चों में अन्य किसी प्रकार के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है। अमित घोष ने बताया कि प्रदेश में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के प्रसार को कम करने के लिए आयरन फोलिक एसिड (IFA) गोलियों के साथ ही गंभीर एनीमिया के उपचार के लिए इंट्रावीनस फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (IV-FCM) जैसे आधुनिक उपचार को भी बढ़ाया जा रहा है, जिसकी केवल एक खुराक से गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी का तेज और प्रभावी उपचार किया जा सकता है। 2026 में राज्य ने इंट्रावीनस आयरन की 3.7 लाख खुराकें खरीदी हैं, जिन्हें जिलों में गंभीर एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को दिया जाएगा।
अमित घोष ने बताया कि एनीमिया मुक्त कार्यक्रम एक संरचित ढांचे पर आधारित है, जिसे 6x6x6 मॉडल कहा जाता है, जिसमें 6 लाभार्थी समूह, 6 प्रमुख हस्तक्षेप और 6 संस्थागत व्यवस्थाएं शामिल हैं, जिसमें छोटे बच्चे, स्कूली बच्चे, किशोर-किशोरियाँ, प्रजनन आयु की महिलाएं, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएं हैं, ताकि एनीमिया की समस्या को जड़ से कम किया जा सके। प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने 6x6x6 रणनीति को सभी 75 जिलों में लागू किया है, इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं । उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए समुदाय का पोषित एवं स्वस्थ रहना ज़रूरी है। मीडिया सहयोगियों से उन्होंने अपील की कि कहा कि वे अपने समाचार पत्रों, चैनल आदि के माध्यम से एनीमिया के लक्षण और प्रबंधन के बारे में लोगों के बीच में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि, इससे सम्बंधित रिपोर्टिंग से प्रेरित होकर लोग समय पर गर्भवती महिलाओं की जांच और उपचार के लिए आगे आएंगे।
महानिदेशक परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश डॉ. हरिदास अग्रवाल ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-3, 2006) में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर 52 थी, जो (NFHS-5, 2021) अब घटकर 46% हो गई है। इसी क्रम में किशोरियों (10-19 वर्ष) में एनीमिया 56.5% से घटकर 52.9% और 6-59 महीनों के बच्चों में 73.9% से घटकर 66.4% हो गया है। साथ ही एनीमिया मुक्त भारत के वर्ष 2024 -25 के स्कोर कार्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश में गर्भवती महिलाओं में आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन की कवरेज 95% तक पहुंच गई है। डॉ. अग्रवाल ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को एनीमिया नियंत्रण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि गर्भवती और धात्री माताओं के लिए नियमित जांच, परामर्श और आईएफए की समय पर खुराक सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे मातृ स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
महानिदेशक प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश डॉ. रंजना खरे ने कहा कि एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रमों की सफलता के लिए स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का नियमित प्रशिक्षण बहुत जरूरी है, ताकि वे सही जानकारी और सही उपचार प्रक्रिया के साथ सेवाएं दे सकें। उन्होंने बताया कि अब तक 10,000 से अधिक जिला और ब्लॉक स्तर के चिकित्सा अधिकारियों एवं स्टाफ नर्सों को नवीन प्रोटोकॉल, जिसमें IV-FCM का उपयोग भी शामिल है, का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अपर निदेशक, आरसीएच, उत्तर प्रदेश, डॉ. अजय गुप्ता ने राज्य में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की प्रगति साझा की। उन्होंने बताया कि आईएफए गोलियों की उपलब्धता और उपयोग में सुधार हुआ है, जिससे लाभार्थियों तक पहुंच बेहतर हुई है। इसके साथ ही, जांच सेवाओं का विस्तार हुआ है और समुदाय स्तर पर जागरूकता भी बढ़ी है। उन्होंने आगे की प्राथमिकताओं में अंतिम स्तर तक सेवाओं की पहुंच, दवा पालन में सुधार, रियल टाइम निगरानी प्रणाली को मजबूत करना और अधिक प्रभावित जिलों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश, डॉ. शालू गुप्ता ने कहा मातृत्व स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम, समय पर जांच, संतुलित पोषण एवं आयरन-फोलिक एसिड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। महाप्रबंधक मातृ स्वास्थ्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रवि दीक्षित ने कहा कि एनीमिया की समय पर पहचान और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में जांच और इलाज सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रीनिंग बढ़ाई जा रही है।







हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 3472
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 1274
हुज़ैफ़ा अबरार September 04 2026 0 742
हुज़ैफ़ा अबरार September 08 2026 0 518
हुज़ैफ़ा अबरार September 01 2026 0 490
हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 434
हुज़ैफ़ा अबरार September 07 2026 0 427
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 9170
एस. के. राणा January 20 2026 0 5656
एस. के. राणा February 01 2026 0 5425
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5418
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5320
एस. के. राणा January 13 2026 0 4949
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4886
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87316
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35400
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38440
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35945
लेख विभाग March 19 2022 0 35581
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73267
जेनेरिक दवाओं के एक ओमनी-चैनल रिटेलर मेडकार्ट के अनुमान से पता चलता है कि इंसुलिन के बिना, घर में ए
परिजनों का आरोप है कि सही समय पर मासूम को इलाजना मिलने के चलते उसकी मौत हो गई। पीड़ित परिजनों ने हॉस
नेजल वैक्सीन शुरुआत में प्राइवेट अस्पतालों में लगेगी। इस वैक्सीन को सरकार ने भारत के कोविड 19 वैक्सी
यदि आप या आपके घर में कोई वायरल से पीड़ित हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि होम्योपैथी में
शहर के सभी सरकारी अस्पतालों में अभी आभा एप के जरिये मरीजों को ओपीडी पर्चे बन रहे हैं। वहीं अब आभा एप
अस्पताल में दो मरीजों की मौत के बाद अफसरों की नींद टूटी है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. अतुल के मुताबिक, द
चीन के लांझू शहर में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन लगा दिया गया है। इस आदेश के साथ ही करीब 4 ला
कोविड के नए वेरिएंट को लेकर लखनऊ समेत सभी जिलों में विदेश से आने वालों की पड़ताल के निर्देश जारी किए
इस दौरान कूलर से मच्छरों की भरमार निकलने पर एंटीलार्वा और फोगिंग का कार्य कराया। साथ ही स्थानीय निवा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय डॉ.मनसुख मांडविया इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। मनसुख मांडविया

COMMENTS