











































Awareness Program Held at Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences on World Mental Health Day
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर संस्थान के अस्पताल भवन स्थित मनोचिकित्सा ओपीडी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम निदेशक प्रो. डॉ. सी. एम. सिंह की उपस्थिति में हुआ। इस वर्ष की थीम अनुभवों को सुनें: वास्तविक आवाज़ें वास्तविक बदलाव” के अनुरूप रोगियों और उनके परिजनों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान 200 रोगियों एवं उनके परिजनों/आमजन को विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं उनके शुरुआती लक्षणों समय पर उपचार दवाओं और परामर्श को नियमित रूप से जारी रखने, पुनर्वास तथा परिवार के सहयोग के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। जनसामान्य के लिए सरल भाषा में तैयार रोगी सूचना-पत्र भी वितरित किए गए ताकि लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी प्राप्त कर सकें और जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ सहायता लें।
निदेशक प्रो. डॉ. सी. एम. सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य को समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा मानसिक रोगों को लेकर समाज में मौजूद झिझक और भेदभाव को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने समय पर पहचान, उचित उपचार और परिवार एवं समुदाय के सहयोग पर बल दिया। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर बिना संकोच चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। डीन प्रो. डॉ. राजन भटनागर ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और समाज से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता, संवेदनशील व्यवहार और समय पर सहायता से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है। रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. सुब्रत चन्द्र ने संस्थान में रोगी-केंद्रित सेवाओं और जन-जागरूकता की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सही जानकारी लोगों को समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित करती है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. विक्रम सिंह ने स्वस्थ जीवनशैली योग नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि ये आदतें तनाव कम करने, शारीरिक स्वास्थ्य सुधारने और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं। लगातार परेशानी होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। प्रो. डॉ. रिचा चौधरी एसोसिएट डीन एवं विभागाध्यक्ष, फॉरेंसिक मेडिसिन ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा जीवन के विभिन्न चरणों में महिलाओं को तनाव, भावनात्मक दबाव और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनकी बात संवेदनशीलता से सुनना, उन्हें सहयोग देना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सहायता उपलब्ध कराना परिवार एवं समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. ए. क्यू. जिलानी ने विशेष रूप से वृद्धावस्था में होने वाली स्मृति संबंधी समस्याओं और डिमेंशिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभार भूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि याददाश्त, सोचने-समझने, रोजमर्रा के काम करने या व्यवहार में लगातार गिरावट आए, तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। समय पर जाँच, सुरक्षित वातावरण, परिवार का सहयोग और उचित देखभाल रोगी के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। डॉ. आकांक्षा शर्मा ने बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर जानकारी देते हुए कहा कि व्यवहार में लगातार बदलाव, अत्यधिक चिंता, उदासी, पढ़ाई में गिरावट, नींद की समस्या या सामाजिक दूरी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग के प्रति सावधान किया तथा बच्चों के लिए स्क्रीन-टाइम में संतुलन, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि, परिवार से संवाद और वास्तविक सामाजिक संपर्क को बढ़ावा देने की सलाह दी।
डॉ. शान्तनु ने बढ़ती नशे की समस्या पर प्रकाश डालते हुए बताया कि तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थ स्वास्थ्य, परिवार, पढ़ाई तथा कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। नशे की समस्या को छिपाने या केवल इच्छाशक्ति की कमी मानने के बजाय समय पर पहचान और उपचार की आवश्यकता है। परिवार को दोषारोपण से बचते हुए व्यक्ति को सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। कार्यक्रम में यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ कमजोरी या चरित्र-दोष नहीं हैं और अधिकांश समस्याओं में सही समय पर उपयुक्त उपचार तथा सहयोग से सुधार संभव है। डॉ. आर.एम.एल.आई.एम.एस. के मनोचिकित्सा विभाग में रोगियों की आवश्यकता के अनुसार मूल्यांकन, परामर्श, मनोचिकित्सा और अन्य उपयुक्त उपचार उपलब्ध हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोचिकित्सा विभाग की रेज़िडेंट्स डॉ. अदिति भाटिया, डॉ. विशाखा श्रीवास्तव, डॉ. समीक्षा अग्रवाल, डॉ. योगेश, डॉ. राहुल और डॉ. विवेक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का आयोजन मनोचिकित्सा विभाग द्वारा IQAC के सहयोग से किया गया।







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