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बेंगलुरु। एक चुनौतीपूर्ण सर्जिकल अनुभव को स्वदेशी चिकित्सा नवाचार में बदलते हुए सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल बेंगलुरु के एडिशनल डायरेक्टर ऑर्थोपेडिक्स डॉ. बनर्जी बी.एच. को उनके आविष्कार ऐपˈरेटस् फॉर ट्रांस-ऑसियस रोटेटर कफ रिपेयर के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है। सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल की वेबसाइट के अनुसार डॉ. बनारजी बी.एच. शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन के विशेषज्ञ हैं तथा अस्पताल में 20 वर्षों से अधिक के क्लिनिकल अनुभव और 15,000 से ज्यादा ऑर्थोपेडिक सर्जिकल प्रक्रियाओं का अनुभव दर्ज है। डॉ. बनर्जी द्वारा विकसित तकनीक में ट्रांस-ओसियस रिपेयर के तहत हड्डी में छोटे टनल बनाकर टेंडन को दोबारा जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में स्यूचर एंकर जैसे इम्प्लांट की आवश्यकता नहीं होती। तकनीक को अधिक व्यवस्थित और दोहराने योग्य बनाने के लिए एक विशेष सर्जिकल जिग भी विकसित किया गया है।
यह पेटेंट ऐसी रोटेटर कफ रिपेयर तकनीक से जुड़ा है जिसमें पारंपरिक स्यूचर एंकर के बजाय मरीज की अपनी हड्डी को फिक्सेशन के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। रोटेटर कफ कंधे की मांसपेशियों और टेंडन का समूह है, जिसके फटने पर कई मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। पारंपरिक रोटेटर कफ रिपेयर में टेंडन को हड्डी से जोड़ने के लिए स्यूचर एंकर का इस्तेमाल किया जाता है। ये एंकर धातु बायोडिग्रेडेबल सामग्री या स्यूचर आधारित हो सकते हैं। पेटेंट प्राप्त यह उपकरण पारंपरिक स्यूचर एंकर की बजाय हड्डी में बनाए गए टनल के माध्यम से रोटेटर कफ रिपेयर करने में सहायता के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक विशेष रूप से ऐसे मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनकी हड्डियों की गुणवत्ता कमजोर है जिसमें बुजुर्ग मरीज और ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित मरीज शामिल हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में पारंपरिक एंकर पर्याप्त मजबूती से पकड़ नहीं बना पाते।
सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल बेंगलुरु के एडिशनल डायरेक्टर ऑर्थोपेडिक्स एवं इस उपकरण के आविष्कारक डॉ. बनर्जी बी.एच. ने कहा इस नवाचार का विचार एक ऐसे चुनौतीपूर्ण रोटेटर कफ रिपेयर के दौरान आया, जिसमें मरीज की हड्डियों की गुणवत्ता कमजोर थी और पारंपरिक एंकर फिक्सेशन चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। रिपेयर की गुणवत्ता से समझौता करने के बजाय मैंने टेंडन को हड्डी के माध्यम से सुरक्षित करने की संभावना तलाशने का निर्णय लिया। इसी अनुभव ने मुझे एक ऐसे उपकरण को विकसित और परिष्कृत करने के लिए प्रेरित किया जो इस तकनीक को सुविधाजनक बना सके। पेटेंट प्राप्त होना मेरे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह ऑपरेशन थिएटर में सामने आई एक चुनौती से लेकर उसके संभावित समाधान तक की यात्रा को दर्शाता है।
डॉ. बनर्जी बी.एच. शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन के विशेषज्ञ हैं तथा अस्पताल में 20 वर्षों से अधिक के क्लिनिकल अनुभव और 15,000 से ज्यादा ऑर्थोपेडिक सर्जिकल प्रक्रियाओं का अनुभव दर्ज है तकनीक का एक संभावित जैविक लाभ भी बताया गया है। हड्डी में बनाए गए टनल रिपेयर वाले स्थान को बोन मैरो के तत्वों के संपर्क में ला सकते हैं, जिनमें ग्रोथ फैक्टर और स्टेम-सेल युक्त तत्व शामिल होते हैं। इनके टेंडन और हड्डी के जुड़ने की प्रक्रिया में संभावित योगदान की बात कही गई है।मेरा उद्देश्य सर्जनों को एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां कमजोर हड्डियों के कारण पारंपरिक एंकर-आधारित रिपेयर मुश्किल हो जाता है। साथ ही, मैं ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने में योगदान देना चाहता हूं।







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