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कार्डियोलॉजी में पहली बार 11 माह की बच्ची का PDA डिवाइस क्लोजर सफल

बच्ची में जन्म से हृदय के पास मौजूद एक रक्त वाहिका खुली रह गई थी, जिसे PDA कहा जाता है। इसके कारण हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। ऐसे बच्चों में तेजी से सांस चलना दूध पीने में थकान वजन न बढ़ना तथा बार-बार छाती में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कार्डियोलॉजी टीम ने कैथेटर के माध्यम से बिना छाती खोले PDA को विशेष डिवाइस लगाकर सफलतापूर्वक बंद किया। प्रक्रिया के बाद बच्ची की स्थिति स्थिर रही और आवश्यक निगरानी के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। इस प्रक्रिया में प्रो. (डॉ.) भुवन चंद्र तिवारी विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी डॉ. आशीष झा डॉ. मिथिलेश यादव तथा डॉ. नीरज अवस्थी की टीम शामिल रही।

हुज़ैफ़ा अबरार
September 26 2026 Updated: September 26 2026 01:08
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कार्डियोलॉजी में पहली बार 11 माह की बच्ची का PDA डिवाइस क्लोजर सफल Prof. (Dr.) Bhuvan Chandra Tiwari Dr. Ashish Jha Dr. Mithilesh Yadav and Dr. Neeraj Awasthi

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के कार्डियोलॉजी विभाग ने 11 माह की बच्ची का PDA (Patent Ductus Arteriosus) डिवाइस क्लोजर सफलतापूर्वक किया। यह RMLIMS के कार्डियोलॉजी विभाग में पहली बार है जब एक वर्ष से कम उम्र के शिशु का इस प्रकार कैथेटर आधारित हृदय उपचार सफलतापूर्वक किया गया है। यह संस्थान में बाल हृदय रोग उपचार के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बच्ची में जन्म से हृदय के पास मौजूद एक रक्त वाहिका खुली रह गई थी, जिसे PDA कहा जाता है। इसके कारण हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। ऐसे बच्चों में तेजी से सांस चलना, दूध पीने में थकान वजन न बढ़ना तथा बार-बार छाती में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कार्डियोलॉजी टीम ने कैथेटर के माध्यम से बिना छाती खोले PDA को विशेष डिवाइस लगाकर सफलतापूर्वक बंद किया। प्रक्रिया के बाद बच्ची की स्थिति स्थिर रही और आवश्यक निगरानी के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। इस प्रक्रिया में प्रो. (डॉ.) भुवन चंद्र तिवारी विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी डॉ. आशीष झा डॉ. मिथिलेश यादव तथा डॉ. नीरज अवस्थी की टीम शामिल रही। निदेशक प्रो. डॉ. सीएम सिंह ने टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा संस्थान में बच्चों के जन्मजात हृदय रोगों के उपचार की सुविधाओं को लगातार विकसित किया जा रहा है।

क्या होते हैं ASD, VSD और PDA
बच्चों में कुछ हृदय संबंधी समस्याएं जन्म से मौजूद होती हैं, जिन्हें Congenital Heart Disease यानी जन्मजात हृदय रोग कहा जाता है। इनमें ASD, VSD और PDA सामान्य जन्मजात हृदय दोषों में शामिल हैं। ASD (Atrial Septal Defect) हृदय के ऊपर के दो कक्षों के बीच की दीवार में छेद को ASD कहा जाता है। छोटा ASD कई बार अपने आप बंद हो सकता है, जबकि बड़ा छेद लंबे समय तक रहने पर हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। 


VSD (Ventricular Septal Defect)
हृदय के नीचे के दो मुख्य कक्षों के बीच की दीवार में छेद को VSD कहा जाता है। बड़ा VSD होने पर बच्चे में सांस फूलना, दूध पीने में कठिनाई, बार-बार संक्रमण तथा वजन न बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है।

PDA (Patent Ductus Arteriosus)
गर्भ में बच्चे के रक्त संचार के लिए एक प्राकृतिक रक्त वाहिका, ductus arteriosus, मौजूद होती है। सामान्यतः जन्म के बाद यह बंद हो जाती है। यदि यह खुली रह जाए तो इसे PDA कहा जाता है। बड़ा PDA फेफड़ों में अधिक रक्त प्रवाह और आगे चलकर pulmonary hypertension का कारण बन सकता है।

इन जन्मजात हृदय रोगों का कारण क्या है?

अधिकांश बच्चों में किसी एक निश्चित कारण की पहचान नहीं हो पाती। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण, गर्भावस्था के दौरान कुछ संक्रमण, कुछ दवाओं या अन्य जन्मजात स्थितियों की भूमिका हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण है कि बीमारी की पहचान और आवश्यक उपचार समय पर हो।

माता-पिता किन लक्षणों पर ध्यान दें?

 दूध पीते समय जल्दी थकना या अत्यधिक पसीना आना
 सांस तेज चलना या सांस फूलना
 बच्चे का वजन अपेक्षा के अनुसार न बढ़ना
 बार-बार निमोनिया या छाती का संक्रमण होना
 खेलते या चलते समय जल्दी थक जाना
 गंभीर हृदय रोग में होंठ या शरीर का नीला पड़ना

प्रो. (डॉ.) भुवन चंद्र तिवारी विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी ने कहा ASD, VSD और PDA जैसे जन्मजात हृदय रोगों की समय पर पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज इनमें से कई बीमारियों का उपचार कैथेटर आधारित डिवाइस तकनीक से बिना ओपन हार्ट सर्जरी के संभव है। उचित समय पर उपचार मिलने से अधिकांश बच्चे सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। उन्होंने बताया कि कार्डियोलॉजी विभाग का लक्ष्य RMLIMS में पेडियाट्रिक कार्डियक केयर एवं जन्मजात हृदय रोगों के इंटरवेंशनल उपचार को चरणबद्ध तरीके से और विकसित करना है, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक बच्चों को अत्याधुनिक हृदय उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

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