












































प्रतीकात्मक
नयी दिल्ली। इंडोनेशिया में कोरोना महामारी के हालात वैसे ही हो गए हैं, जैसे कि अप्रैल-मई में भारत के थे। बुधवार को इंडोनेशिया में 54,517 नए कोविड-19 केस मिले हैं। यह इंडोनेशिया में एक दिन के सर्वाधिक मरीज का रिकॉर्ड है। इस तरह अब यह एशिया का नया कोरोना हब बन गया है।
एक साथ इतनी तादाद में मरीज मिलने से इंडोनेशिया में हड़कंप के हालात हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द हालात काबू में नहीं आए तो देश का स्वास्थ्य तंत्र ढह सकता है। हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा और देश में हाहाकार मच सकता है।
इंडोनेशिया विश्व का चौथा सर्वाधिक आबादी वाला देश है। देश की आबादी 27 करोड़ से ज्यादा है। यहां एक दिन में उतने कोरोना मरीज मिल रहे हैं, जितने गत माहों में भारत में मिला करते थे। यदि संक्रमण का यह तेज दौर जारी रहा तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। गत शनिवार को प्रकाशित एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता की एक करोड़ से ज्यादा आबादी में से आधी आबादी कोरोना संक्रमित हो सकती है। वहां गत सप्ताह आपात लॉकडाउन लगाया गया है।
आखिर क्यों हुए ऐसे हालात?
जानकारों का कहना है कि इंडोनेशिया के ये हालात अचानक नहीं हुए हैं। देश कड़ा लॉकडाउन लागू नहीं करने, कोरोना जांच नहीं करने और कांट्रेक्ट ट्रेसिंग से किनारा करने का दंड भोग रहा है। अधिकारी यह अंदाजा भी नहीं लगा सके कि कोरोना वायरस की मौजूदा लहर कितनी तेजी से फैल रही है। अब वे चिंता कर रहे हैं कि यदि इतनी तादाद में मरीज मिलने का सिलसिला जारी रहा तो अस्पताल भी मरीजों को संभाल नहीं सकेंगे।
बेड तेजी से भर रहे, ऑक्सीजन हो रही खत्म
चूंकि वायरस का अधिक घातक डेल्टा वेरिएंट तेजी से फैल रहा है, इसलिए मौतों की संख्या भी बढ़ रही है। बुधवार को 991 मौतें हुईं। इसके साथ ही देश में अब तक 69,210 मरीजों की मौत हो चुकी है। सरकारी न्यूज एजेंसी अंतारा के अनुसार देश के अस्पतालों के 1.20 लाख बेड में से 90 हजार से ज्यादा भर चुके हैं। प्राणवायु ऑक्सीजन के दाम बढ़ गए हैं तो इसकी किल्लत भी होने लगी है।
सिर्फ 5.5 फीसदी को लगे टीके
सीएनएन के वैक्सीन ट्रेकर के मुताबिक इंडोनेशिया की कुल आबादी के मात्र 5.5 फीसदी लोगों को ही अब तक टीके लग सके हैं। प्रधानमंत्री जोको विडोडो ने उम्मीद जताई है कि टीकाकरण के दम पर देश इस वैश्विक संकट से जल्द उबर जाएगा।







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