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शोधकर्ताओं में
निदेशक व हेपेटोलॉजी: प्रो. आर.के. धीमन प्रो. अमित गोयल डॉ. अजय कुमार मिश्रा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी व पेडियाट्रिक गैस्ट्रो प्रो. राकेश अग्रवाल प्रो. उदय चंद्र घोषाल प्रो. उज्ज्वल पोद्दार प्रो. अंशु श्रीवास्तव न्यूरोलॉजी: स्वर्गीय प्रो. यू.के. मिश्रा प्रो. जयंती कालिता नेफ्रोलॉजी व क्रिटिकल केयर: प्रो. नारायण प्रसाद प्रो. मोहन गुर्जर अन्य विभाग: प्रो. गौरव अग्रवाल (एंडोक्राइन सर्जरी), प्रो. रमा देवी मित्तल (मेडिकल जेनेटिक्स), प्रो. प्रभाकर मिश्रा व डॉ. मोना पाठक (बायोस्टैटिस्टिक्स), डॉ. रोहित सिन्हा (एंडोक्राइनोलॉजी), प्रो. स्वस्ति तिवारी (मॉलिक्यूलर मेडिसिन), डॉ. दुर्गा प्रसन्ना मिश्रा (इम्यूनोलॉजी)। युवा शोधकर्ता: एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की पोस्ट-डॉक्टरल फेलो डॉ. सना रज़ा और हेपेटोलॉजी विभाग की रिसर्च एसोसिएट डॉ. मनीषा दुबे। इस उपलब्धि पर पीजीआई के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने खुशी जताते हुए कहा एसजीपीजीआई अब केवल बेहतर इलाज का ही नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय अनुसंधान का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।
निदेशक ने कहा यह सफलता केवल वैज्ञानिकों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे एसजीपीजीआई की अकादमिक संस्कृति का परिणाम है। युवा शोधकर्ताओं ने जिस तरह कम समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, वह आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल होगी। हमें अनुसंधान और नवाचार के इस स्तर को आगे भी बनाए रखना होगा। यह ऐतिहासिक सफलता न केवल एसजीपीजीआई बल्कि लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक व चिकित्सीय साख को वैश्विक मंच पर एक नई ऊंचाई प्रदान करती है। मैं चयनितों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं।







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