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लखनऊ। मायोपिया को आम भाषा में नज़र का माइनस होना या निकट दृष्टिदोष कहते हैं। इसमें व्यक्ति को पास की चीज़ें साफ दिखाई देती हैं, लेकिन दूर की चीज़ें धुंधली दिखाई देती हैं। मायोपिया में आंख की लंबाई सामान्य से थोड़ी अधिक हो सकती है या आंख की फोकस करने की क्षमता अधिक होती है। इसलिए दूर की वस्तु से आने वाली रोशनी रेटिना पर पड़ने के बजाय उसके आगे फोकस हो जाती है।
विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर आई-क्यू हॉस्पिटल्स ने बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ाने की पहल की है। इसके तहत लखनऊ के राजाजीपुरम सेंटर में मायोपिया कंट्रोल/मायोपिया क्लिनिक शुरू की गई है। यह पहल आई-क्यू के लव योर आइज़ किड्स अभियान का हिस्सा है। इस अभियान का मकसद बच्चों में आंखों की परेशानी को समय पर पहचानना और माता-पिता को बच्चों की आंखों की नियमित जांच के लिए जागरूक करना है। विश्व दृष्टि दिवस हर साल लोगों को आंखों की देखभाल और अच्छी नजर के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। इसी मौके पर आई-क्यू ने बच्चों में बढ़ रही मायोपिया की समस्या पर ध्यान केंद्रित किया है।
डॉ. उत्सव दीप ने कहा कई बार बच्चों को खुद पता नहीं चलता कि उनकी नजर कमजोर हो रही है। वे बिना शिकायत किए रोजमर्रा के काम करते रहते हैं। जब तक बच्चा दूर की चीजें या स्कूल का बोर्ड देखने में परेशानी बताता है, तब तक समस्या बढ़ सकती है। विश्व दृष्टि दिवस पर हमारा प्रयास है कि माता-पिता बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर समय रहते जागरूक हों। मायोपिया क्लिनिक के जरिए बच्चों की जांच के साथ माता-पिता को भी सही जानकारी दी जाएगी:
राजाजीपुरम में शुरू की गई नई मायोपिया क्लिनिक में बच्चों की आंखों की जांच और मायोपिया से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही माता-पिता को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि बच्चों की नजर में होने वाले बदलावों को समय पर पहचानना क्यों जरूरी है।
इस पहल का नेतृत्व डॉ. उत्सव दीप क्लिनिकल इंचार्ज आई-क्यू लखनऊ और डॉ. जी.सी. दुबे ने किया। डॉ. उत्सव दीप ने कहा कई बार बच्चों को खुद पता नहीं चलता कि उनकी नजर कमजोर हो रही है। वे बिना शिकायत किए रोजमर्रा के काम करते रहते हैं। जब तक बच्चा दूर की चीजें या स्कूल का बोर्ड देखने में परेशानी बताता है, तब तक समस्या बढ़ सकती है। विश्व दृष्टि दिवस पर हमारा प्रयास है कि माता-पिता बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर समय रहते जागरूक हों। मायोपिया क्लिनिक के जरिए बच्चों की जांच के साथ माता-पिता को भी सही जानकारी दी जाएगी।
मायोपिया में बच्चों को दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। इसके कुछ सामान्य संकेत हैं, जैसे मोबाइल या टीवी को बहुत पास से देखना किताब को आंखों के बहुत करीब रखकर पढ़ना दूर देखने के लिए आंखें सिकोड़ना स्कूल में बोर्ड देखने में परेशानी होना बार-बार सिरदर्द होना या आंखों को बार-बार रगड़ना। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चों की आंखों की जांच कराना जरूरी है। डॉ. जी.सी. दुबे ने कहा बच्चों में आंखों की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर आंखों की जांच से समस्या का पता जल्दी चल सकता है और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही कदम उठाया जा सकता है। हम माता-पिता से अपील करते हैं कि बच्चों की आंखों की नियमित जांच को उनकी सामान्य स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाएं।
सामान्य लक्षण
इसका इलाज कैसे होता है?
आमतौर पर माइनस नंबर वाले चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से साफ दिखाई देता है। कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह से मायोपिया को नियंत्रित करने के विशेष उपचार या वयस्कों में सर्जरी के विकल्प भी होते हैं।
लव योर आइज़ किड्स अभियान के तहत आई-क्यू बच्चों और माता-पिता को आंखों की सही देखभाल मोबाइल और स्क्रीन का सही इस्तेमाल बाहर खेलने और नियमित आंखों की जांच के बारे में जागरूक करेगा। राजाजीपुरम में मायोपिया क्लिनिक की शुरुआत के साथ आई-क्यू का उद्देश्य बच्चों की आंखों से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान और सही सलाह को आसान बनाना है। विश्व दृष्टि दिवस के तहत अस्पताल आगे भी माता-पिता, स्कूलों और आम लोगों के बीच बच्चों की आंखों की देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करेगा।







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